महराजगंज/रायबरेली: अस्पताल में तैनाती के नाम पर दो-दो डॉक्टर चार चार स्टाफ नर्स फार्मेसिस्ट और वार्ड बॉय तैनात है। वेतन पर ही सरकार का पांच छे लाख रुपए महीने में खर्च होता है। लेकिन अस्पताल का हाल बेहाल है। एक फार्मासिस्ट व एक वार्ड बॉय को छोड़कर बाकी के डॉक्टर और स्टॉप करते नौकरी करते हैं तथा तनख्वाह टेंशन की तरह ले रहे हैं। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय महराजगंज की यह शिकायत सामने आई है। जहां आने वाले रोगियों और उनके तीमारदारों का आरोप है कि, जब यहां मरीज दिखाने को आते हैं, तो डॉक्टर और पूरा स्टाफ गायब रहता है, तथा फार्मेसिस्ट से दवा लिखाकर वापस जाने को मरीज मजबूर होते हैं। अस्पताल में गंदगी का साम्राज्य है।
सीलन भरे कमरे में आयुर्वेद की मूल्यवान दवाएं इधर-उधर बिखरी पड़ी रहती है। जब सारी व्यवस्था के बारे में हमारी टीम ने अस्पताल का दौरा किया, और मौजूद स्टाफ से डॉक्टर का फोन नंबर लेकर बात की, तो डाक्टर सालनी सचान ने लखनऊ में होने का दावा करते हुए बताया कि, आप परेशान ना हो, कल सुबह हम आ कर आपको सारी बातें बताएंगे, और दूसरे दिन यानी शुक्रवार को अस्पताल में वह मौजूद रही, और उन्होंने बताया कि, अस्पताल का ना अपना भवन है, ना गंदगी साफ करने के लिए कोई सफाई कर्मी है। रैक सरकार ने दी नहीं, तो दवाइयां रखे तो कहां रखें। बाकी स्टाफ के बारे में उन्होंने दावा किया है कि, रोजाना सभी डॉक्टर और कर्मचारी समय से आते हैं। समय से जाते हैं। लेकिन बदहाल सूरत में अस्पताल यहां का हाल खुद बयां कर रहा है।फर्श पर रखी आयुर्वेदिक दवाएं
आपको बता दें कि, महराजगंज रायबरेली रोड पर बैंक ऑफ बड़ौदा के नीचे राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय चलना बताया जा रहा है। कुछ मरीजों द्वारा यह शिकायत किए जाने पर कि, वह लोग प्रायः आयुर्वेदिक इलाज के लिए जब राजकीय चिकित्सालय जाते हैं, तो वहां एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं रहता। कर्मचारियों की उपस्थिति के नाम पर महज फार्मेसिस्ट और एक वार्ड बॉय ही मौजूद रहता है। जो मरीजों से पूछ कर उनको दवाई लिख कर दे देता है। यह हाल विगत कई वर्षों से बदस्तूर चल रहा है। मजबूर होकर मरीज निजी प्रैक्टिस करने वाले आयुर्वेदाचार्यों के पास जाने को मजबूर हैं। जहां महंगी महंगी दवाएं खरीदने को लोग विवश हो जाते हैं।
फर्श पर रखी आयुर्वेदिक दवाएंराजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के बारे में लोगों ने बताया कि, कहने के लिए यहां डॉक्टर सुनील कुमार और डाक्टर सालनी सचान के अलावा फार्मासिस्ट अशोक कुमार और स्टाफ नर्स मिथिलेश सिंह, पुष्पा सिंह, प्रियंका पांडेय इसके अलावा वार्ड बॉय परमहंस तैनात हैं। लोगों का कहना है कि, डॉक्टर सुनील कुमार और डॉक्टर शालिनी सचान महीने में एक-दो दिन ही आती है। बाकी हाजिरी रजिस्टर खुला रहता है। जिसमें अक्सर कर्मचारी ही उनकी आमद दर्ज करा देते हैं। यदि कहीं कोई प्रशासनिक या विभागीय अधिकारी आ जाए, तो कैजुअल अवकाश के लिए लिखे हुए प्रार्थना पत्र रखे रहते हैं, जो अधिकारी को दिखा दिया जाता है। इसके अलावा जब डॉक्टर ही अस्पताल में मौजूद नहीं मिलते तो स्टाफ नर्स इसका पूरा फायदा उठाती हैं, और वह भी हफ्तो हफ्तों तक अस्पताल नहीं आती है। महज फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय अस्पताल का बोझ कंधे पर ढो रहे हैं।
मरीजों की तादाद के बारे में कहा जाता है कि, रोजाना फर्जी नाम दर्ज करके मरीजों की तादात रजिस्टर में अंकित कर दी जाती है। ताकि अधिकारियों को पता चले कि, यह आयुर्वेदिक अस्पताल वास्तव में तीमारदारों की जमकर सेवा कर रहा है। जहां तक अस्पताल भवन में रखी दवाओं का सवाल है, तो सारी दवाएं इधर-उधर बिखरी पड़ी मिली, और कूड़े का भी ढेर इधर-उधर लगा मिला। इस बारे में जब डॉक्टर शालिनी से पूछा गया, तो उनका कहना था कि, ना अस्पताल के पास अपना भवन है। ना ही दवाओं को रखने के लिए रैक या अलमारियां है, और ना ही परिसर की साफ सफाई करने के लिए कोई सफाई कर्मी है। क्या वह खुद झाड़ू लगाएं। इस संवाददाता के द्वारा जब डॉक्टर शालिनी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के बारे में याद दिलाई गई, तो उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री को आकर खुद यहां व्यवस्था करानी चाहिए। इसके अलावा रोजाना हाजरी के बारे में डॉक्टर शालिनी सचान जोर देकर कहती है कि, वह रोजाना अस्पताल आती है। लखनऊ से उनका आना जाना होता है। उनकी सेवा से इलाके के आने वाले सभी मरीज पूरी तरह संतुष्ट है। वह एक बार में ही हर मरीज को 15 दिन की दवाएं लिख देती हैं। ताकि मरीज को रोज रोज अस्पताल ना आना पड़े। अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं के बारे में क्षेत्रीय नागरिकों से जानकारी की गई तो सभी के मन में अस्पताल के प्रति गहरी नाराजगी है। विभाग के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्साधिकारी के बारे में पता चला है कि, जब से वह कोरोना पॉजिटिव होकर इलाज के लिए गए हैं, तब से यह मनमानी और उभर कर सामने आई है। जिससे मरीजों का हाल बेहाल है।








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