DM साहब! आपका ध्यान किधर है, असली भ्रष्टाचारी इधर है: अपने कारनामों के चलते सुर्खियां बटोर रहा है ताजुद्दीनपुर ग्राम पंचायत का पंचायत मित्र देवनाथ।। Raebareli news ।।

 

                      (प्रधान पति राजू सिंह)
रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: ग्राम पंचायत ताजुद्दीनपुर के पंचायत मित्र देवनाथ इस समय गांव की राजनीति में अपने कारनामों के चलते सुर्खियां बटोर रहे हैं। इसमें सबसे ताजा मामला ग्राम प्रधान की जानकारी बगैर एक फर्जी प्रस्ताव बनाकर अपात्र के नाम प्रधानमंत्री आवास आवंटित किए जाने के कागज पर प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर उसको आवास दिलाना, चर्चा का विषय बना हुआ है। देवनाथ की करतूतों की पोल परत दर परत खुलने लगी है। एक मामला यह भी सामने आया है कि, गांव के एक गरीब आदमी से परिवार रजिस्टर की नकल बनाने के नाम पर पंचायत मित्र ने 500 रुपए लिए हैं, साथ ही साथ प्रधान प्रतिनिधि व प्रधान पति शिव प्रताप सिंह उर्फ राजू से 35 हजार रुपए उधार लिए जाने के बाद, प्रधान पति द्वारा जब पैसा मांगा गया, तो पैसा देने में आनाकानी करने पर दोनों लोगों के बीच कहासुनी भी हुई। यह भी मामला चर्चा में है।

     इसके अलावा मनरेगा जैसी स्कीम में करीब 100 मजदूरों का फर्जी नाम डालकर उसके बदले मजदूरों के अकाउंट में पैसा पहुंचने के बाद मजदूरों से पैसा वसूलने का भी आरोप है। हालांकि इस संवाददाता से बातचीत में पंचायत मित्र देवनाथ ने आरोपों पर सफाई देने का प्रयास, तो किया किंतु सच्चाई का सामना करने में वह लड़खडाने लगे।

                     ग्राम प्रधान राजकुमारी सिंह
   
आपको बता दें कि, अपने रिकॉर्ड तोड़ विकास कार्यों के लिए जाना जाने वाला ताजुद्दीनपुर गांव इस बार वहां तैनात पंचायत कर्मी देव नाथ के कारनामों से फिर से एक बार चर्चा में आ गया है। गांव में 18 लोगों को प्रधानमंत्री आवास प्रदान किए गए हैं। हालांकि प्रधान राजकुमारी सिंह ने आवासों के लिए व्यक्तियों का चयन करते समय काफी सतर्कता बरती थी, और कोशिश यह की गई थी कि, कोई पात्र व्यक्ति छूटने ना पाए, और अपात्र व्यक्ति लाभ ना लेने पाए। किंतु चर्चा इस बात की है कि, इन 18 वें लोगों में से एक नाम ऐसा भी है, जिसके पास पक्का मकान, अच्छी खासी जमीन मौजूद है, और उसे भी आवास का लाभ मिल गया है।

       प्रधान राजकुमारी सिंह और उनके पति राजू सिंह ने जब मामले की जांच कराई, तो पता चला कि, 18 वें व्यक्ति का चयन तो पंचायत मित्र की देन है। क्योंकि उसी ने फर्जी प्रस्ताव बनाकर प्रधान के फर्जी दस्तखत करके अपात्र को भी पात्र घोषित कर लाभ दिला दिया। यह भी चर्चा में है कि, उस दौरान प्रधान प्रतिनिधि शिव प्रताप सिंह उर्फ राजू सिंह एक मामले में जेल में निरूद्ध थे, और मौजूदा ग्राम प्रधान भी गांव में मौजूद नहीं थी। अब आम जनता में यह भी चर्चा है कि, प्रधान और प्रधान प्रतिनिधि जब यहां मौजूद ही नहीं थे, तो प्रस्ताव कैसे पारित हो गया। प्रधान के हस्ताक्षर कैसे हो गए। यह मामला गांव वासियों में बहस का मुद्दा बना हुआ है।

     दूसरे पूरे हनुमंत सिंह गांव के रहने वाले बेहद गरीब तबके के पंचम पासी पुत्र भगौती पासी जब परिवार रजिस्टर की नकल लेने गया, तो दर्जनों बार दौड़ाने के बाद पंचायत मित्र देवनाथ ने जब उससे 500 रुपए वसूल लिए, तभी जाकर परिवार रजिस्टर की नकल दिया। जबकि प्रधान और प्रधान पति ने इस बात के सख्त निर्देश दे रखे हैं कि, कोई भी कर्मचारी गांव के किसी भी नागरिक से सरकारी कामकाज के मामलों में 10 पैसे भी नहीं लेगा। इस बात की जानकारी होने पर ग्राम प्रधान ने पंचायत मित्र को जमकर लताड़ लगाई और प्रधान प्रतिनिधि ने पंचम पुत्र भगौती को अपनी जेब से 500 रुपए वापस किए हैं। ग्राम प्रधान व उनके पति का दावा है कि, किसी भी काम कराने के बदले उन लोगों ने जनता से पैसे लेने की बात तो दूर किसी की एक कप चाय आज तक नहीं पी है। यदि कोई साबित कर दे, तो वह प्रधानी छोड़ देंगे, और राजनीति से संन्यास ले लेंगे।

     इसी प्रकार ग्रामीण मजदूरों को रोजगार देने के लिए सरकार द्वारा संचालित मनरेगा योजना के तहत काम कराए जाने और मजदूरी का भुगतान करने के मामले में भी पंचायत मित्र देवनाथ का फर्जीवाड़ा चर्चा में है। आरोप है कि, लगभग 100 लोगों का मस्टर रोल पर फर्जी नाम अंकित कर, पंचायत मित्र ने पैसा उनके खातों में ट्रांसफर कराया, फिर एक एक मजदूर से खाते में आई मजदूरी की रकम को निकाल कर देना का अभियान चलाया। कई मजदूरों द्वारा भुगतान निकाल कर देने से मना करने के बावजूद तमाम मजदूरों को पंचायत मित्र बहला-फुसलाकर पैसा निकालने में कामयाब रहा। इस बात की जानकारी प्रधान और उसके पति को हुई, तो उन लोगों ने पंचायत मित्र देवनाथ को बुलाकर जमकर फटकार लगाई। इसी बात से नाराज होकर पंचायत मित्र प्रधान विरोधियों के खेमे में चला गया, और उनके हाथ की कठपुतली बनकर नाच रहा है। 

     प्रधान पति राजू सिंह का यह भी कहना है कि, एक आवश्यक कार्य बताकर पंचायत मित्र ने उनसे 35 हजारों रुपए यह कहते हुए कि, 10, 15 दिन में वापस कर देंगे, उधार ले लिया, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी वह पैसा वापसी के लिए सनक नहीं रहा है। तगादा करने पर पंचायत मित्र देवनाथ हत्थे से उखड़ गया, और विरोधी खेमे में जाकर प्रधान पति के खिलाफ साजिशें रचने लगा है।

    उपर्युक्त कारनामों के चलते चर्चा में आया पंचायत मित्र देवनाथ के बारे में राजू सिंह का कहना है कि, विगत एक-दो दिन में विपक्षियों के साथ मिलकर उसने मीडिया को प्रधान पति के विरुद्ध सरकारी कामों में हस्तक्षेप करने का जो, आरोप लगाया है, उसके पीछे पंचायत मित्र का भ्रष्टाचार और प्रधान विरोधी खेमे के लोगों की पेसबंदी ही जिम्मेदार है। राजू सिंह ने कहा कि, उनकी मालिक जनता है, वह जनता के प्रति जवाब देह हैं। इन विपक्षियों के विकल्पों के बावजूद वह जनता की सेवा में तन मन धन से समर्पित रहे हैं, और आगे भी रहेंगे। उन्हें किसी नेता, अधिकारी की परवाह नहीं है। परवाह है, तो सिर्फ जनता जनार्दन की।

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