♂मानाकि दर्द में ही अश्कों का निकलना है, तू रोक ना सकेगा हँसके दिखाता क्यूँ है।
♂है प्यार पाक रिश्ता इसको सम्भालते हैं, इजहार प्यार का तू उससे छुपाता क्यूँ है।
♂हम माने मगर किसकी सब कहते तजुर्बा है, तुम भी तो आजमालो करता ही यक़ी क्यूँ है।
♂मैने भी जमाने में देखे बहुत बवंडर, तू एक बवंडर से ही थर्राता अभी क्यूँ है।
♂हैं बड़े बोल आदत कहने की तुम्हारी भी, पूरा नहीं है होना, कहता सभी से क्यूँ है।
♂है काम जरा मुश्किल करना तो किसी को है, तुम सब्र से जुट जावो बेसब्र अभी क्यूँ है ।
♂करता है मुसाफिर एक बहकी हुई सी बातें, हफ्तों से नहीं सोया उसका ये हाल क्यूँ है ।
♂है मसला बड़ा भारी मुश्किल है निकलना भी, जीवन का एक हिस्सा है भूल जाता क्यूँ है।
♂है आज फ़िज़ा में घोली गई बेगैरत, पहले नहीं था ऐसा अब ऐसी दशा क्यूँ है ।
♂जो हैं गरीब उनको दुनिया में बहुत दुख है, है पास तेरे दौलत उनको सताता क्यूँ है।
◆रचयिता~कमल बाजपेयी

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