¶"दीपमालिका मंगलमय हो"

 

¶"दीपमालिका मंगलमय हो"

¶जलें दीप अब द्वारे - द्वारे, अंधकार की वारे - न्यारे ।

¶दीपक राग छेड़ दो भाई, नई रोशनी घर - घर आई ।

¶अंधकार से रिक्त धरा हो, पंचतन्त्र की हो अगुआई ।

¶चारो तरफ खिले चेहरे हों, जियो और जीने दो भाई ।

¶माँ का प्यार बहन की इच्छा, हर किसान जवान की चिन्ता,

¶निभे पड़ोसी धर्म  हमारा, एक - एक से होते ग्यारह,

¶अतिथि हमारा देव तुल्य हो, देश रहे प्राणों से प्यारा,

¶सभी स्वस्थ हों सभी सुखी हों, भूमि उर्वरा वृक्ष फले हों ।

¶सभी पढ़े हों जननायक हों, रामराज्य के परिचायक हों,

¶कृष्ण सुदामा से कुछ सीखो, निर्धन धनी सभी अपने हों,

¶जीव जन्तु  सभी में ईश्वर, पूरे नेक सभी सपने हों,

¶ब्याधि हटे निर्भय जन - जन हो, दीपमालिका मंगलमय हो ।


 ¶रचयिता~कमल बाजपेयी

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ