रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रकार की कालकृतियां यथा-पुरा सामग्री, मुद्रायें, सज्जा-कला व कलात्मक वस्तुऐं तथा प्राकृतिक विज्ञान से सम्बन्धित पशु-पक्षियों का उत्कृष्ट संग्रह है। इन कलाकृतियों को दर्शकों के अवलोकनार्थ विभिन्न वीथिकाओं में प्रदर्शित किया गया है। पूर्व से स्थित संग्रहालयों के अतिरिक्त कई जनपदों में नये संग्रहालयों का निर्माण भी प्रस्तावित है। पूर्व में विद्यमान संग्रहालयों के साथ-साथ नये निर्मित हो रहे संग्रहालयों के लिए उपरोक्त प्रकार के सामग्रियों के संग्रहण की आवश्यकता है।
आपको बता दें कि, विभिन्न व्यक्तियों/संस्थाओं के पास उपरोक्त विषयक पुराने समय की बहुमूल्य वस्तुएं उपलब्ध होती हैं, जिन्हें वे प्रदर्शन हेतु एवं शोधार्थियों के लाभार्थ दान भी करना चाहते हैं। उपर्युक्त वस्तुएं प्राप्त होने से इनका संरक्षण करते हुए संग्रहालयों में जनसामान्य के लिए प्रदर्शन किया जा सकेगा जिससे युवा पीढ़ी को ज्ञान प्राप्त हो सकेगा तथा सम्बन्धित विषय के शोध में भी मद्द मिलेगी। इसके लिए सभी समाजसेवियों से भी सहयोग प्राप्त किया जा सकता है। अपने जनपद में उपरोक्त विषयक पुराने समय के बहुमूल्य वस्तुओं को दान या उपहार के रूप में प्राप्त करते हुए निदेशक, संग्रहालय निदेशालय, उ0प्र0 लखनऊ को उपलब्ध करा सकते है। इस प्रकार के दान दाताओं अथवा उपहार देने वाले व्यक्तियों के नाम व पता संग्रहालय द्वारा प्रदर्शित किया जायेगा। उपरोक्त सम्बन्ध में प्रभावी समन्वय कर कार्य करने के लिए संग्रहालय निदेशालय, उ0प्र0 लखनऊ की सहायक निदेशक अल्शाज फातमी (मो0नं0.7355605032 एवं ई-मेल आई0डी0 उनेमनउकपतमबजवतंजतम/हउंपसण्बवउ) को नोडल आफिसर नामित किया गया है।

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