रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: कांग्रेस के प्रदेश सचिव सुशील पासी ने आरोप लगाया है कि, धान खरीद के नाम पर प्रदेश सरकार के इशारे पर खरीद में जुड़ी एजेंसियों ने किसानों का जमकर उत्पीड़न किया है। जितना खरीद के मामले में इस सत्र में किसानों का उत्पीड़न हुआ है। उतना इससे पहले कभी नहीं हुआ था। उल्टे योगी सरकार और उनके अधिकारी अपने ही हाथों अपनी पीठ ठोक रहे हैं।
आपको बता दें कि, कांग्रेस प्रदेश सचिव सुशील पासी ने बताया कि, धान खरीद की पूरे प्रदेश में हुए भ्रष्टाचार की कोई सीमा नहीं है। उन्होंने कहा कि, पूरे खरीद की सीबीआई जांच करा ली जाए, तो पता चल जाएगा। जितनी धान खरीद हुई है उसमें लगभग 90% धान बिचौलियों और व्यापारियों से खरीदा गया है। किसान तो खरीद केंद्रों के चक्कर पर चक्कर लगाते रहे और मायूस होकर बिचौलियों और व्यापारियों को औने पौने दामों पर माल बेचकर हताश निराश होकर घरों को वापस लौट गए। उन्होंने एक मिसाल देते हुए कहा कि, प्रशासन ने किसानों को धान बिक्री करने के लिए इतनी औपचारिकताएं पूरी करने में उलझा दिया कि, किसान निराश होकर अपनी उपज को कौड़ियों के भाव बेचने पर विवश हो गए।
श्री पासी ने उसका एक उदाहरण देते हुए कहा कि, खरीद के समय इंतखाब खतौनी के साथ इंतखाब खसरा भी मांगा जाता है। खसरे में लेखपाल यह प्रमाणित कर देता है कि, कितनी जमीन पर किसान ने कौन सी फसल बोई है। बावजूद इसके पंजीकरण कराने के बाद खरीद केंद्र पर जाने पर इंतखाब खसरा खतौनी जमा करने के बाद भी सत्यापन की कार्यवाही करवाई जाती है। अब अधिकारी बताएं कि, क्या इंतखाब खसरा पर्याप्त नहीं है ? ऐसे ही कई किसानों का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि, खसरा खतौनी के बाद भी किसानों को सत्यापित करने के लिए तहसील के दर्जनों चक्कर लगाने पड़े। उन्होंने कहा कि, या तो सरकार को अपने लेखपालों की खसरा खतौनी पर यकीन नहीं है? जबकि सत्यापित भी लेखपाल द्वारा ही किया जाता है। तो यह किसानों को परेशान करने का तरीका नहीं है।
उन्होंने कहा कि, सरकार एमएसपी को वापस न लेने की बात तो करती है। जबकि लगता यह है कि, खरीद के नाम पर किसानों को इतना ज्यादा उत्पीड़ित कर दिया जाए, ताकि वह अगली उपज के लिए खरीद केंद्रों तक ही ना पहुंच पावे। सुशील पासी ने कहा कि, वह पूरे मामले को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा के अलावा राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी तक पहुंचाएंगे।

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