डिप्टी आरएमओ के तुगलकी फरमान के बाद आंदोलित हो सकतें है महराजगंज के किसान।। Raebareli news ।।

 

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: एक ओर जहां प्रदेश सरकार किसानों के धान खरीद के बारे में बड़े-बड़े दावे कर रही हैं। सरकार लगातार किसान हितैषी होने का दम भर रही है, तो दूसरी ओर सरकार के ही कुछ अधिकारी सरकारी दावो के उलट किसानों का उत्पीड़न करने में लगे हैं। ऐसा ही एक मामला महराजगंज मंडी परिसर स्थित विपरण शाखा में खरीद के लिए लगवाए गए दो कांटों में से एक कांटे को जिले के डिप्टी आरएमओ ने आदेश देकर बंद करा दिया है। जबकि अभी भी क्षेत्र भर में खरीद लक्ष्य के लगभग 5000 कुंटल का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। मंडी स्थल पर विपणन शाखा पर ट्रैक्टर ट्रालिओं की कतारें लगी है। किसान इधर-उधर भटक रहा है। कई किसान तो एक एक हफ्ते से ट्राली लिए मंडी परिसर के अंदर और बाहर अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं, तो वहीं खरीद के लिए तैनात अधिकारी किसानों के रोष से बचने के लिए इधर-उधर मुंह छुपाते फिर रहे हैं।


    आपको बता दें कि, एक ओर जहां बड़ी तादात में किसान देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर सरकार द्वारा संसद में पास कराए गए तीनों कृषि विधेयकों को वापस लेने के लिए आंदोलन चलाते हुए लगभग डेढ़ महीने से डेरा जमाए बैठे हैं, तो दूसरी ओर महराजगंज मंडी परिसर के अंदर और बाहर सैकड़ों किसान ट्रैक्टर ट्रालीयां लिए हुए खुले आसमान के नीचे हफ्तों से रातें गुजार रहे हैं।


     इनका धान तोलने के लिए जो व्यवस्था जिले के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कराई थी, उन्होंने किसानों का धान जल्दी से जल्दी खरीदने के लिए महराजगंज विपणन शाखा में एक कांटे से बढ़ाकर दो कांटे कर दिए थे, जिसका लाभ किसानों को मिला। इसी के चलते अब तक 842 किसानों की लगभग 49 हजार कुंतल खरीद हो पाई है, और उसी अनुपात में दस बारह किसानों को छोड़ दिया जाए, तो सभी के खातों में भुगतान भी पहुंच चुका है।

      इस व्यवस्था से किसान काफी खुश थे, लेकिन जिले के डिप्टी आरएमओ ने तुगलकी फरमान जारी करते हुए विगत 14 जनवरी 2020 को एक आदेश जारी कर जिलाधिकारी द्वारा लगवाए गए दूसरे कांटे को बंद करवा दिया है, साथ ही अधीनस्थों को जबानी निर्देश देकर खरीद की रफ्तार बहुत धीमी करने का भी आदेश दिया है। जिससे सारी व्यवस्था जो अब तक सुचारू रूप से चल रही थी, गड़बड़ा गई है, और जब किसानों को इस बात का पता चला तो उनके अंदर आक्रोश पनप रहा है।


    किसानों बाल किशोर त्रिपाठी, उमानाथ सिंह, हनुमान, नंद कुमार पांडेय, अंशुमान सिंह, छंगा लाल, नीरज यादव, गया प्रसाद यादव, श्रीराम, तथा शिवपाल आदि का कहना है कि, वह एक एक हफ्ते से टोकन लेने के बावजूद दी गई तिथियों पर धान लेकर यहां बेचने आए हैं, लेकिन एक ही कांटा चलने की वजह से तीन तीन चार चार दिन से वह लोग मंडी में पड़े हुए हैं। यहां ना तो खाने पीने का कोई इंतजाम है, और ना ही सिर छुपाने का कोई स्थान, किसान ट्रैक्टर ट्राली के नीचे रातें गुजार रहे हैं। यदि व्यवस्था में सुधार नहीं लाया गया, तो किसानों का यह दर्द आक्रोश में बदल सकता है। किसान कोई भी आंदोलन करने को दिवस हो सकते हैं।

     वहीं दूसरी ओर मामले में स्थानी एसएम आई से बात करने का प्रयास किया गया, तो वह केंद्र पर नही मिले, और उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ मिला।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ