रायबरेली पुलिस का कारनामा बलात्कार पीड़िता को दिया जोर का झटका, पैसा और रसूख के आगे पीड़िता की एक न चली।। Raebareli news ।।



रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए पूरे देश में नई-नई प्रभावी योजनाएं बनाकर लागू की जा रही हैं, और महिलाओं के आत्मसम्मान में उनको न्याय दिलाने के लिए कानून बनाए जा रहे हैं। जगह जगह गोष्ठियां और सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। प्रायः सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं को सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण को पूरी ताकत से अमल में लाने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर महिला सशक्तिकरण के दिवस पर बछरावां थाने की पुलिस ठीक इसके उल्टे काम करने में जुटी थी। यहां के एक दरोगा अरशद नदीम के एक कारनामें से महिला सशक्तिकरण अभियान को पूरी तरह से पलीता लगा दिया है।

    आपको बता दें कि, मामला रायबरेली जनपद के थाना बछरावां क्षेत्र के सेहंगो पश्चिम गांव का है। यहां के रहने वाले एक आरोपी को दरोगा जी! ने बलात्कार जैसे भयंकर जुर्म से ना केवल क्लीन चिट दे दी, बल्कि भुक्तभोगी महिला को महीनों कोरा आश्वासन देकर टहलाते रहे। बछरावां थाना क्षेत्र की ही एक गांव निवासिनी अविवाहिता युवती ने पुलिस को एक शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि, सेहंगो पश्चिम गांव का रहने वाला यशपाल पुत्र तेज नारायण ने 23 अक्टूबर 2020 को मोटरसाइकिल से पीड़िता के घर पहुंचा था, और पीड़िता से यह कहकर की उसकी मां गंभीर रूप से बीमार है। तुम्हें देखने के लिए बुलाया है, और मोटरसाइकिल पर बैठाकर अपने गांव ले आया। जहां घर पर पीड़िता ने देखा वहां कोई मौजूद नहीं था, और जबरन मुंह काला किया तथा रिपोर्ट करने पर जान से मारने की धमकी देकर आरोपी घर से चला गया।

     पीड़िता किसी तरह सेहंगो पश्चिम गांव से थाना बछरावां पहुंची, और पुलिस को तहरीर दिया। लेकिन कोतवाली पुलिस ने न तो पीड़िता का मेडिकल कराया, और न ही अन्य कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। थाने के लगातार चक्कर काट-काट कर परेशान हो गई। पीड़िता ने अंततोगत्वा न्यायालय की शरण ली और न्यायालय ने पुलिस को पीड़िता की तहरीर दर्ज कर विवेचना करने को निर्देश दिए।

     इसके बाद भी पुलिस कई दिन के बाद रिपोर्ट तो दर्ज कर लिया। किंतु विवेचक अरशद नदीम ने पीड़िता की डॉक्टरी तक नहीं कराई, और धारा 161, 164 कराने में काफी हीला हवाली की। किसी तरह 164 बयान हो गया। बावजूद उसके धीरे-धीरे महीनों बीत गए। पीड़िता लगातार पुलिस पर अभियुक्त को गिरफ्तार करने की मांग करती रही। परंतु विवेचक ने उसे गिरफ्तार नहीं किया, और पीड़िता को दिलासा दिलाते रहे कि, कुछ औपचारिकताएं और पूरी कर ले, तो इसे जेल भेजेंगे।

    उधर पीड़िता लगातार थाने के चक्कर लगाती रही, और प्रकरण से क्षेत्राधिकारी महराजगंज को भी अवगत कराया गया। पीड़िता को उच्चाधिकारियों के पास जाते देख विवेचक ने आनन-फानन महिला सशक्तिकरण मनाने के दिन ही पूरे प्रकरण में अंतिम रिपोर्ट लगाते हुए बलात्कारी को निर्दोष घोषित कर दिया। इसके बाद अभियुक्त लगातार पीड़िता का उपहास उड़ाते हुए जगह-जगह कह रहा है कि, पैसे में बहुत ताकत होती है, अभी पीड़िता के साथ वह यह कुकृत्य फिर करेगा। अब पीड़िता मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। अब सवाल ये उठता है कि, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लाख महिला सशक्तिकरण का दावा करें, जब पूरे सिस्टम में ही खोट है, तो धरातल पर कुछ होने वाला नहीं है। जब तक धरातल पर काम करने वाले सरकार के नुमाइंदे अपनी सोच और कार्यप्रणाली में सुधार नहीं लाते है, तब तक प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बड़े-बड़े बयान जुमलेबाजी ही साबित होंगे।

     फिलहाल पीड़िता ने न्याय पाने के लिए अंतिम सांस तक लड़ने का संकल्प कर लिया है। पीड़िता ने बताया कि, वह चुप नहीं बैठेगी। विवेचक की करतूतों को शासन और प्रशासन के उच्चाधिकारियों के अलावा आवश्यकता पड़ी तो, फिर न्यायालय की भी शरण लेगी।

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