महराजगंज/रायबरेली: बीते 24 घंटे के दौरान वायरल फीवर सांस लेने में परेशानी और जुखाम जैसी बीमारियों से ग्रसित होकर महराजगंज, मऊ, अजीजगंज गढ़ी जैसे गांव में 14 लोगों की मृत्यु हो जाने की खबर से पूरे इलाके में मातम का माहौल पसर गया है। मरने वालों में विद्युत संविदा कर्मी, प्राइवेट चिकित्सक, अधिवक्ता और भाजपा नेता की मां शामिल है। आम जनमानस यह नही समझ पा रहा है कि, यह हो क्या रहा है। उधर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार लोगों को झोलाछाप से इलाज न कराने की, मरीजों को सीधे सरकारी अस्पतालों में आने की सलाह दी जा रही है। परंतु कोरोना महामारी के पॉजिटिव घोषित न कर दिया जाए, इसलिए बीमारी को लोग छुपा कर गांव में ही इलाज करा रहे हैं।
आपको बता दें कि, मऊ और महराजगंज में चार चार मौतें हुई हैं। इनमें मऊ गांव के रहने वाले रिटायर्ड फौजी कृष्ण कुमार मिश्रा उर्फ मुन्ना उम्र लगभग 60 वर्ष को दो-तीन दिनों से बुखार और जुकाम की शिकायत थी, उनके लड़के शोभित मिश्रा ने बताया कि, सांस लेने में भारी दिक्कत होने पर उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी चल रही थी कि, उन्होंने घर पर ही दम तोड़ दिया। इसी प्रकार मऊ के ही शत्रोहन ठेकेदार की बहू सरिता जायसवाल 50 को तेज बुखार आया, उनके पति गुड्डू जायसवाल ने बताया कि, सुबह सांस लेने में परेशानी होने पर सीएचसी महराजगंज ले जाया जा रहा था, तथी सीएचसी महराजगंज पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
जबकि गांव के ही सत्रोहन मिश्रा जो बिजली मैकेनिक का काम देते थे, इनके छोटे भाई भरत लाल मिश्रा ने बताया कि, विगत 1 सप्ताह से उन्हें खांसी जुखाम की शिकायत थी, सीएचसी में जांच कराने पर वह कोरोना पॉजिटिव निकले। इलाज के लिए उन्हें लालगंज के लेबल टू कोविड पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
वहीं गांव के ही अजय कुमार पांडेय 38 जो पेशे से प्राइवेट डॉक्टर थे, उनको चार-पांच दिनों से वायरल फीवर हो गया था। शनिवार की सुबह उन्हें सांस लेने में भारी दिक्कत हुई, फिर परिजन उन्हें सीएससी महराजगंज ले गए। यहां से उन्हें रायबरेली रेफर किया गया। उनके छोटे भाई अतुल कुमार एडवोकेट ने बताया कि, रायबरेली से लालगंज के बीच में उनकी मौत हो गई। इसके अलावा बावन बुजुर्ग बल्ला गांव के दीवानी में कार्यरत युवा अधिवक्ता मोहम्मद अकबर 40 की भी तबीयत बिगड़ी और लालगंज level-2 हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हो गई। जब गांव उनका शव लाया गया तो कोहराम मच गया।
इसके अलावा महराजगंज कस्बे में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला प्रभारी मोहम्मद अनवर कुरेशी उर्फ चिड्डा की मां रशीदुल निशा की भी आज सांस फूलने और वायरल बुखार से मौत हो गई। उनके लड़के अनवर चिड्डा ने बताया कि, इतना समय भी नहीं मिला कि, इलाज के लिए उन्हें अस्पताल ले जाया जा सके। वहीं कस्बे के बछरावां रोड पर कोतवाली के पड़ोस में रहने वाले माता प्रसाद हलवाई 55 के बारे में उनके भाई मनमोहन ने बताया कि, विगत कई दिनों से उन्हें बुखार आ रहा था। रात में उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई, तो एक प्राइवेट अस्पताल ले गए, जहां उनकी मौत हो गई। जबकि, कस्बे में रहने वाले अब्दुल रशीद उर्फ रसू नाई 60 तथा कस्बे के घेरा गांव में रहने वाले मोहम्मद इजहार जो पहले से बीमार चल रहे थे, किंतु दो-तीन दिनों से तेज बुखार और खांसी आने के बाद आज दोपहर दोनों की तबीयत बिगड़ गई। इलाज के लिए उन्हें सीएचसी लाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
इसी प्रकार गढ़ी मजरे अतरेहटा गांव में राम सजीवन मौर्य को विगत 1 हफ्ते से खांसी जुखाम बुखार का प्रकोप था। शुक्रवार की दोपहर बाद अचानक उनकी सांसें फूलने लगी। उनके लड़के राजू ने बताया कि, उपचार के लिए उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था, जहां रास्ते में मौत हो गई। गांव के ही श्री राम पासी 65 को भी तेज बुखार के साथ सीने में जकड़न की शिकायत हुई, और घर पर ही उनकी शनिवार की शाम मौत हो गई, उनके लड़के राकेश ने बताया कि, उनका कुछ दिनों से इलाज चल रहा था। इसके अलावा अजीजगंज मजरे बावन बुजुर्ग बल्ला के रहने वाले राम सुमिरन मौर्य के बारे में परिजनों ने बताया कि, वह ठीक ठाक थे, सोमवार की सुबह सांस लेने में दिक्कत की समस्या उन्होंने बताई, इलाज के लिए उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया जा रहा था, रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। बावन बुजुर्ग बल्ला गांव के ही कलंदर गंज गांव में ट्रेक्टर ड्राइवर रामप्रकाश ने बताया कि, उनकी मां को भी वायरल फीवर हुआ। सांस लेने में दिक्कत शुरू हुई। दिखाने अस्पताल ले जा रहे थे कि, मौत हो गई।
अधीक्षक डॉ राधाकृष्णन सीएचसी महराजगंजइन ताबड़तोड़ हो रही मौतों के बारे में जब अधीक्षक डॉ राधाकृष्णन से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि, आकस्मिक सेवाओं के लिए सीएचसी 24 घंटे खुला रहता है। अधिकतर लोग वायरल फीवर जुखाम बुखार को हल्के में ले कर इलाज के लिए यहां नहीं आते हैं। जिससे समस्याएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि, स्वास्थ्य संबंधी कोई भी दिक्कत होने पर तत्काल मरीज को झोलाछाप डॉक्टरों को दिखाने की बजाय सीएचसी लाया जाए। यहां हर संभव इलाज करने का प्रयास किया जाता है। यदि कोई मामला अब तक गंभीर प्रतीत होता है, तो तत्काल उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।


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