प्यार का गीत" (कमल बाजपेई)

प्यार का गीत तुम गुनगुनाओ प्रिये,

हर लबों पे तराना मचल जायेगा,

बाँसुरी सी सुरीली धुनें तो बजें,

अश्क पलकों के घूँघट में आ जायेगा,

छेड़ दो रागिनी आज कान्हा सी तुम,

प्यार का रूप राधा सा हो जायेगा ।

प्यार का गीत तुम गुनगुनाओ प्रिये ।।

खिल उठा मन मयूरा हवा फागुनी,

इंद्र धनुषी नजारे मनचले लगे,

रूप मादक तुम्हारा सताने लगा,

हाथ मैंने लगाया नशा छा गया,

मन गुलाबी हुआ तन शराबी हुआ,

नेह की बूँद से तरबतर हो गया ।

प्यार का गीत तुम गुनगुनाओ प्रिये ।।

राग से हैं सने शब्द सुनता रहा,

मन कसकता रहा प्यार के बोल को,

प्रेम के ढ़ाई आखर तुम्ही ने कहा,

यूँ लगा आज जीवन सफल हो गया,

चाँद हँसने लगा रुत गुलाबी हुई,

नींद गायब हुई रात जगता रहा ।

प्यार का गीत तुम गुनगुनाओ प्रिये ।।

रचयिता~कमल बाजपेयी

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ