महराजगंज प्रथम से धुरंधरों की दावेदारी से टिकट पर निर्णय लेने से सहमे हैं बड़े-बड़े दल।। Raebareli news ।।

 

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई महराजगंज की जिला पंचायत सदस्य प्रथम की सीट राजनीतिक धुरंधरों के लिए चुनावी महासमर बन चुका है। यहां दांव आजमाने के लिए बड़े-बड़े नामचीन लोग मैदान में उतर चुके हैं। लेकिन सबसे पहली बाधा तो राष्ट्रीय दलों के दावेदारों के सामने हैं कि, भारी कशमकश के बीच चारों बड़े दल जैसे भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा ने अभी तक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। चर्चा तो यह भी है कि, भाजपा और सपा में टिकट को लेकर नेता आपस में ही सर फुटव्वल पर आमादा हैं। इसकी एक बानगी सत्ताधारी पार्टी की जनपद पर हुई बैठक में देखने को मिला। चर्चा है कि, बैठक में मनचाहे उम्मीदवार का नाम पैनल में शामिल ना होने पर एक नेता जी! बैठक से ही तमतमा कर बाहर चले गए। यही हाल लगभग समाजवादी पार्टी खेमे में भी है। जबकि पार्टी द्वारा उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी गई है। लेकिन इसमें भी महराजगंज प्रथम के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई है। वहीं कांग्रेस में पार्टी प्रत्याशी का नाम 10 जनपद भेजा गया है। वहां से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। जबकि बसपा खेमे में बनी रणनीति अभी तक सामने नहीं आई है। हालांकि कई लोग स्वयं को पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर चुनाव मैदान में उतर चुके हैं।

     आपको बता दें कि, जब से शासन द्वारा रायबरेली जिले की जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई है। तब से महराजगंज प्रथम की सीट के इर्द-गिर्द जिले की राजनीति सिमट कर आ गई है। चर्चा है कि, यहां से जीतने वाला जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी का प्रबल दावेदार होगा। इसका प्रमाण है कि, भाजपा से दो बार विधायक रह चुके पूर्व विधायक राजाराम त्यागी भाजपा खेमे में सबसे प्रबल दावेदार हैं। समर्थकों का तो यही दावा है कि, श्री त्यागी का नाम आम सहमति से जिले द्वारा लखनऊ भेजा जा चुका है। जहां अंतिम मुहर लगनी है। 

    वहीं उनके मुकाबले भाजपा से दूसरे दावेदार मातादीन पासी का पार्टी से बहुत पुराना रिश्ता है। वह एक बार पार्टी टिकट पर विधायक का चुनाव भी लड़ चुके हैं। हालांकि उन्हें आशातीत कामयाबी नहीं मिली थी। इसके अलावा वह एक बार यहां से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार चुके हैं। उनका दावा है कि, उन्होंने विजई प्रत्याशी को कड़ीऊ टक्कर देते हुए महज कुछ मतों के अंतर से चुनाव हारे थे।

    इन दोनों के अलावा एक अन्य प्रत्याशी जो हरचंदपुर क्षेत्र का रहने वाला है। उसकी भी होल्डिंग में एक पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष का नाम लगा है। वह भी यहां से टिकट मांग रहा है। बताया जाता है कि, जिला पंचायत की राजनीति के पुरोधा एक जनप्रतिनिधि उस को टिकट दिलाने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगाए हुए हैं। अब बात करते हैं, दूसरी बड़ी पार्टी सपा की। तो यहां पर पार्टी के दो बार विधायक रह चुके रामलाल अकेला ने अपने पुत्र विक्रांत अकेला को प्रबल दावेदार बनाकर पार्टी से टिकट मांगा है। जिसके लिए वह दिन और रात एक किए हुए हैं। किंतु पार्टी के ही एक पूर्व विधायक श्यामसुंदर भारती ने अकेला के वर्चस्व को चुनौती देते हुए अपनी पत्नी चंद्रकला को टिकट का दावेदार घोषित करते हुए प्रचार कार्य भी शुरू कर दिया है। चुनाव क्षेत्र में बड़ी तादात में समाजवादी पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं के चित्र सहित चंद्रकला के रंगीन पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि इस द्वंद्व युद्ध में पार्टी नेतृत्व यह फैसला नहीं ले पा रहा है कि, दोनों महारथियों में किस पर दांव लगाएं, और किस को शांत कराएं।

    अब चलते हैं कांग्रेसी खेमे की ओर, जहां टिकट को लेकर कोई विधायक या पूर्व विधायक तो नहीं लगा है। लेकिन यहां पर दो पूर्व जिला पंचायत सदस्य के अलावा क्षेत्रीय नेता छेदीलाल पासी का प्रचार चरम पर है। उनको कांग्रेस के हाल ही में नियुक्त किए गए प्रदेश महासचिव सुशील पासी का वरदहस्त प्राप्त है। लेकिन छेदीलाल के टिकट को हरी झंडी मिलने के लिए 10 जनपद की स्वीकृति का इंतजार है। इसके अलावा बसपा की बात करें, तो दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों से जिला पंचायत सदस्य रहे कई नेता चौकड़ी भांज रहे हैं। पार्टी की ओर से अभी किसी की घोषणा नहीं हुई है। कुल मिलाकर राजनीतिक दलों के सामने धर्म संकट है कि, किसको टिकट दे, और किसको किनारे रखें। क्योंकि सभी दावेदार वजन वाले हैं। खतरा यह भी है कि, अगर टिकट न दिया गया, तो भितरघात होने की बड़ी संभावना है।

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