कवि की कल्पना: स्वर्ग लोक का लाकडाउन

धरती पर महामारी को देखते हुए एक दिन श्री हरि से नारद मुनि बोले, कि हे प्रभु धरती की तरंह स्वर्ग में भी लाकडाउन होना चाहिए---------

◆पत्रकार नारद जी को हुई चिन्ता भारी।

◆हे प्रभु स्वर्ग लोक में भी लाकडाउन हो जारी।

◆बार-बार यमदूत यूँ ही  धरती पर जायेंगे ।

◆तो वह भी जल्द संक्रामित होकर आयेगे ।

◆धीरे-धीरे नेतागण स्वर्ग लोक आ रहें हैं ।

◆वह यहाँ भी चुनावी महौल बना रहे हैं।

◆धरती का बुद्धिजीवी मानव स्वर्ग में आ रहा है।

◆वह अपने साथ कोरोना सैम्पल ला रहा है ।

◆फिर स्वर्ग में भी चारो तरफ फैलेगी महामारी।

◆यहाँ भी कोरोना टेस्टिंग होगी जारी।

◆इंद्र लोक की नृत्यांगनाऐ ऊर्वसी, मेनका, रम्भा।

◆अगर संक्रामित हो जायेंगी तोह।

◆इंद्रपुरी के डीजे, आरकृष्टा बाधित हो जायेगे।

◆जैसे धरती पर लोग बैंक, ATM, में लम्बी लाइन लगाते हैं।

◆पर दो गज दूरी, मास्क जरूरी का नियम अपनाते हैं ।

◆स्वर्ग में भी लोग लम्बी लाइन लगाये हैं।

◆पर दो गज दूरी, मास्क जरूरी का नियम नहीं अपनाये है।

◆चित्र गुप्त जी मानव कर्म फल रजिस्टर खोले बैठें हैं।

◆पाप-पुण्य कर्मो का लेखा-जोखा देखते हैं।

◆अगर वह संक्रामित हो जायेगें, तोह भर्ती होने कहाँ जायेगें।

◆हे प्रभु स्वर्ग में एम्स, नानावटी, पीजी आई, अस्पताल नहीं है।

◆आक्सीजन, वैक्सीन मेडिकल सुविधाओं की कमी है।

◆इस लिए समस्या विकट खड़ी है ।

 ◆तोह हे प्रभु कुछ ऐसा नियम बनाओ।

◆स्वर्ग लोक में भी लाकडाउन का धर्म निभाओ।

◆ऊपर से नीचे, कोई ना जा  सके।

नीचे से ऊपर ना कोई आ सके, सोचो-थोड़े दिन ऐसा हो जाये--तो क्या हो-----

◆पत्रकार नारद जी को हुई चिन्ता भारी।

◆स्वर्ग लोक का लाकडाउन हो जारी।

                Stay Home, stay safe 

              पुष्पा रावत ( स. अ.महराजगंज )

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