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◆हे शिव शंकर पार्वती चरण पकड़ अरदास,कमल तुम्हारा विपति में तुम ही होऊ सनाथ ।
◆आज जलंधर प्रकट हो करता है प्रतिघात,
लोग डरे घर में घुसे चेहरों पर है मास्क,
बात व्यर्थ है त्रिपुरारी कोई नहीं है साथ,
बहुत भरोसा आपका हो प्रभु मेरे पास,
भाई बन्धु नाते जगत सब में भय है व्याप्त,
आज समझ में आ गई प्रभु सबको औकात ।
◆त्रिपुरा का भी वध किया पापों का दे दण्ड,
काम देव को भस्म कर पाप किए सब खण्ड,
महादेव प्रभु आपपर टिकी हमारी आस,
दास आपका मैं सदा देता यह विश्वास,
हे गिरिजापति, नीलकण्ठ, त्रिपुरारी, शंकर शिव शम्भू,
खुले तीसरा नेत्र आपका जन सुखकारी हर शम्भू ।
◆मिटे रोग भय व्याधि जरा सब,
मृत्यु हरे सुरभी सुत वाला,
डमरू बाजे डम डम डम डम,
मुण्डमाल भस्म मृगछाला,
चले त्रिशूल, चक्र, गंगाजल,
शिव का चंद्र भक्त प्रतिपाला
चारो द्वार लगाओ बन्दी,
द्वारपाल बनाओ नंदी,
शंकर करो निशंक सभी को,
यम को आज बनाओ बंदी
भोले तेरा मुझे सहारा,
और नहीं जो कोई उबारा ।
रचयिता ~ कमल बाजपेयी

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