◆कोतवाल के हस्तक्षेप से आखिरकार लावारिस पड़े शव को चार कंधे हुए नसीब, रेखा सिंह के इस कार्य की हो रही जमकर सराहना।
रजनीकांत अवस्थीमहराजगंज/रायबरेली: आखिरकार सड़क के किनारे लावारिस पड़े कन्हैया लाल के शव को चार कंधे नसीब हो गए और सम्मानजनक तरीके से उसका अंतिम संस्कार हो सका। मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर आम जनता में जमकर सराहना हो रही है।
आपको बता दें कि, कोतवाली क्षेत्र के गांव पूरे मूड़ू मजरे अतरेहटा के रहने वाले कन्हैयालाल भहेलिया के आगे पीछे कोई नहीं था। महज परिवार में भतीजे ही थे। कन्हैया लाल के माता पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी। गरीब होने के कारण वह दूसरों का काम धंधा करके जो कुछ भी मिलता था, खा लेता था, और खानाबदोश की जिंदगी जी रहा था। परिवार के लोगों से भी उससे कोई खास नाता रिश्ता नहीं था।
बताते हैं कि, पिछले चार-पांच दिनों से उसकी तबीयत खराब थी, और वह हैदरगढ़ रोड पर सुखई के पुरवा गांव में सड़क के किनारे पड़ा रहता था। कल देर शाम उसकी वही मृत्यु हो गई। आसपास के लोगों ने मूंड़ू के पुरवा स्थित उसके भतीजे को खबर भी दी। लेकिन घंटों बीत गए, कोई उसे देखने तक नहीं आया। तभी यह बात कोतवाली प्रभारी रेखा सिंह को पता चली, तो उन्होंने आनन-फानन हल्का दरोगा जमुना प्रसाद तिवारी और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। कोतवाल के निर्देश पर आनन फानन उसके परिजनों की तलाश की गई। पुलिस ने परिजनों को बुलाकर शव का अंतिम संस्कार सम्मान पूर्वक ढंग से कराने के कड़े निर्देश दिए। तब जाकर कन्हैयालाल बहेलिया को चार कंधों का सहारा मिला, और शुक्रवार को उसका विधि विधान से अंतिम संस्कार किया गया। क्षेत्रीय लोगों ने कोतवाल रेखा सिंह के इस कार्य की जमकर सराहना की है।

0 टिप्पणियाँ