⭕ भगवान श्री कृष्णा अपने महारास से पूरे विश्व को संदेश दिया है। इस रासलीला को देखने देवता भी विभिन्न रूपों में पहुंचते थे। श्री कृष्ण गीत संगीत, नृत्य ही नही राजनीति में भी निपुण हैं। कलाओं व गुणों से भी उनका सौंदर्य पूरे ब्रम्हांड में प्रचलित हुआ।
विस्तार........
मथुरा: बाल रूप में भगवान श्री कृष्ण जी को जितना भी देखिए मन तृप्त नही होता है। उनकी बांसुरी की धुन सुनकर गोपियां ही नही, गौ माता भी खींची चली आती थी, सुध-बुध खो बैठती थी। उक्त बातें अयोध्या धाम से पधारे आचार्य अजय शुक्ल ने नगर के वार्ड नं 47 कृष्ण विहार कालोनी में आयोजित श्री कृष्ण भगवान की कथा को सुनाते हुए श्रद्धालुओं से कही है।
आपको बता दें कि, आचार्य अजय शुक्ल कहा कि, श्री कृष्ण जी को दो चीजें बहुत ही प्रिय थी, एक बांसुरी, दूसरी राधा रानी।नटराज भगवान शिव हैं तो नटनागर श्री कृष्ण जी है। उन्होंने अपने महारास से पूरे विश्व को संदेश दिया है। इस रासलीला को देखने देवता भी विभिन्न रूपों में पहुंचते थे। श्री कृष्ण गीत संगीत, नृत्य ही नही राजनीति में भी निपुण हैं। कलाओं व गुणों से भी उनका सौंदर्य पूरे ब्रम्हांड में प्रचलित हुआ।
उन्होंने बताया कि, आज के परिवेश में हर अच्छे लोंगो में भगवान श्री कृष्ण की छवि दिखती है। अगर मानव भगवान श्री कृष्ण का आचरण अपने जीवन में उतार लें तो वह संसार रूपी भवसागर से पार हो जाएगा। उनका राधिका जी से प्रेम व द्रौपदी से सखा धर्म को नही भुलाया जा सकता है। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि अगर व्यक्ति किसी भी देवता को सच्चे मन से याद करे तो वह उस पर कभी भी संकट नही आने देंते। अगर संकट आया तो उबार लेंगे, जैसे द्रौपदी का उबारा था।
कथा के दौरान मुख्य यजमान सुनैना देवी, गोपाल तिवारी, पंडित अभय तिवारी, पंडित चंदन, निप्पू, आचार्य आशुतोष, रिशु, संदीप कुमार, आकाश, अनु खुशी, रत्न आदि प्रमुख रूप से शामिल हुए।


0 टिप्पणियाँ