रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: कस्बे के हैदरगढ़ रोड पर स्थित महावीर स्टडी इस्टेट सीनियर सेकेंडरी कॉलेज में आज शुक्रवार को प्रार्थना सभा में प्रधानाचार्य कमल वाजपेई ने बच्चों को बताया कि, श्रावण मास शुक्ल पक्ष में नाग पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। महाभारत के बाद कलयुग की शुरुआत हुई, जो स्वर्ण में निवास करता था।
आपको बता दें कि, प्रार्थना सभा में प्रधानाचार्य ने बच्चों को बताया कि, अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित आखेट हेतु जंगल में गए थे, प्यास के कारण शमिक ऋषि के आश्रम पहुंचे जो साधना रत थे। परीक्षित के पुकारने पर न बोलने के कारण परीक्षित ने एक मृत सर्प शमिक ऋषि के गले में डाल दिया। शमिक ऋषि के पुत्र श्रृंगी ऋषि ने देखा तो श्राप दे दिया कि, जिसने मृत सर्प उनके पिताजी के गले में डाला है, उसकी सात दिनों में सर्प काटने से मृत्यु हो जाएगी। परीक्षित की मृत्यु तक्षक के काटने से हुई।
उन्होंने बताया कि, परीक्षित के पुत्र पांडव वंश के अंतिम राजा जन्मेजय ने सर्प यज्ञ किया। सभी सर्प हवन कुंड में जलने लगे। तक्षक ने सूर्य के रथ को पकड़ लिया और रथ सहित हवन कुंड में जाने के कारण देवताओं ने हवन रोकने की प्रार्थना की। पर जन्मेजय नहीं माने। आस्तिक मुनि के कहने पर तक्षक के प्राण बच्चे तथा हवन समाप्त हुआ।
प्रधानाचार्य ने बताया कि, भारत में स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं में काकोरी की घटना अत्यंत महत्वपूर्ण है। 4 फरवरी 1922 में गोरखपुर में घटित चौरी चौरा घटना के बाद गांधी जी ने 11 फरवरी 1922 को बारडोली गुजरात में असहयोग आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की गई। इससे क्रांतिकारी आंदोलन को पुनर्जीवित कर दिया। चंद्रशेखर आजाद, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, डॉक्टर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र नाथ लाहिडी ने 1924 में हिंदुस्तान रिपब्लिक संगठन की स्थापना की। इसका उद्देश्य सशस्त्र क्रांति जिससे शस्त्र-अस्त्र खरीदना, नौजवान भार्ती तथा ट्रेनिंग जिसमें धन की आवश्यकता थी। अतः 9 अगस्त 1924 को शाहजहांपुर से लखनऊ जा रही आठ डाउन ट्रेन के खजाने को काकोरी के निकट क्रांतिकारियों ने कब्जा कर लिया। घर पकड़ हुई मुकदमा चला। राम प्रसाद बिस्मिल, राजेंद्र लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह को फांसी हुई। सचीद्रनाथ को काला पानी आजीवन, मनमथ नाथ गुप्त को 14 वर्ष का कारावास हुआ तथा चंद्रशेखर आजाद पकड़ में नहीं आए और 27 फरवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क इलाहाबाद में ब्रिटिश पुलिस से सशस्त्र संघर्ष में वीरगति को प्राप्त हुए।
आजादी के अमृत महोत्सव में इस घटना को आज 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। समस्त स्टाफ एवं बच्चे भरे गले नम् आंखों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित किया, प्रधानाचार्य ने सभी बच्चों और उनके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं।
इस अवसर पर पीआरओ राजीव मिश्रा, सौरभ श्रीवास्तव, अनिमेष मिश्रा, नीरू बाजपेई, आलोक, अमित सिंह, रामविलास, लक्ष्मी सिंह, अनुपम सिंह, रामजी, अयोध्या प्रसाद, गंगा प्रसाद, रामकेश, सुमिरन, जगदीश तिवारी, गोमती, सुनीता आदि उपस्थित रहे।


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