पित्र-पक्ष विशेष-कमल बाजपेई

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ईश्वर को देखा नहीं कभी 

अनुभव करता हूँ रोज मगर

ज्यों हवा दिखाई न देती 

ठंडक देती है डगर-डगर।  

फोटो थी हाँथ नयन भीगे

हँसते ही दिखे आज बाबू 

है तर्पण आज पूर्वजों का 

वे मनुज नहीं थे सब साधू।

है पित्रपक्ष यह अति पावन 

तर्पण,अर्पण,संवर्धन का 

मानव की रक्षा करने का

दीनों के प्रति आकर्षण का।

जीते जी भी सम्मान करें

वृद्धों पर पूरा ध्यान धरें 

सामर्थ्य योग्य उनका पालन 

वचनों से उनका मान करें।

कमल वाजपेई प्रधानाचार्य महावीर स्टडी इस्टेट महराजगंज

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