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ईश्वर को देखा नहीं कभी
अनुभव करता हूँ रोज मगर
ज्यों हवा दिखाई न देती
ठंडक देती है डगर-डगर।
⭕ फोटो थी हाँथ नयन भीगे
हँसते ही दिखे आज बाबू
है तर्पण आज पूर्वजों का
वे मनुज नहीं थे सब साधू।
⭕ है पित्रपक्ष यह अति पावन
तर्पण,अर्पण,संवर्धन का
मानव की रक्षा करने का
दीनों के प्रति आकर्षण का।
⭕ जीते जी भी सम्मान करें
वृद्धों पर पूरा ध्यान धरें
सामर्थ्य योग्य उनका पालन
वचनों से उनका मान करें।
कमल वाजपेई प्रधानाचार्य महावीर स्टडी इस्टेट महराजगंज

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