शौर्यवीर ऑनरेरी कैप्टन देवी प्रसाद मिश्र की स्मृति में सादर समर्पित: "भारत माँ के हे वरद पुत्र"

🎶 यह गाथा उस शूरवीर की, 

जो बभनी गांव में जन्म लिया।

शौर्य, त्याग, कर्तव्य, कृतित्व से, 

जिला प्रतागढ़ को धन्य किया।

🎶 लहू का हर एक कतरा-कतरा, 

भारत मां पर न्यौछावर किया।

तीन दशक थल सेना में सेवा, 

तीन महायुद्ध को फतह किया।।

🎶 62, 65 और 71 के युद्ध में, 

दुश्मन के सामने अड़ा रहा।

दुश्मन को धूल चटाने तक, 

निज छाती ताने खड़ा रहा। 

🎶 इतना ही नहीं देवी प्रसाद को, 

कई वीरता पुरस्कार मिला।

जीवन के अंतिम सांस तलक, 

अडिग पथिक बन सतत् चला।।

🎶 ठहरा नहीं एक पल भी वह, 

जब से सेवामुक्त हुआ।

समाज सेवा की अलख जगाकर, 

हम सबको सन्मार्ग दिया।।

🎶 1930 में जन्म लिया और, 

28 अक्टूबर 24 को महाप्रयाण।

शूरवीर देवी प्रसाद मिश्र पर,

राष्ट्र को है सदा अभिमान।।

🎶 तुम्हारे अहसानों का कर्ज

हम कभी चुका नहीं पाएंगे,

अमर प्रयाण भले ही हुआ,

युग-युग तक गाए जाएंगे।।

🎶 मैं नमन करूं वंदन करूं,

करूं तुम्हारा नित सम्मान।

आज धरा पर गूँज रहा,

देवी प्रसाद का गौरवगान।।

🎶 हे वीर तुम्हे दे महा विदा,

धरती माता गमगीन हुई।

अपने भी याद में डूब गए,

नीलम भी शोक संतप्त हुई।।

🎶 जब तक सूरज-चंद्र रहेंगे,

गंगा में बहता रहेगा पानी! 

शौर्यवीर देवी प्रसाद की, 

अमर रहेगी सदा कहानी!! 

🎶 नमन! नमन! हे वीर नमन! 

करता है सारा राष्ट्र नमन! 

भारत माँ के हे वरद पुत्र!

'शिवम्' का है सस्नेह नमन!!

डॉ. शिवम् तिवारी

साहित्यकार

अंतू, प्रतापगढ़ (उ. प्र.)

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