संत गाडगे महराज वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले समाज सुधारक थे -कमलेश चौधरी

सार........

⭕ विभिन्न संगठनों द्वारा संत गाडगे चौक में 68वाँ परिनिर्वाण दिवस मनाया गया।

विस्तार.........

रायबरेली: संत गाडगे महराज का 68वाँ परिनिर्वाण दिवस विभिन्न संगठनों द्वारा संत गाडगे चौक रायबरेली में मनाया गया। इस अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। 

     आपको बता दें कि, गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए संत गाडगे सेवक कमलेश चौधरी ने कहा कि, संत गाडगे महराज वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले समाज सुधारक थे। उन्होनें अपना पूरा जीवन दलितों और दलितों की सेवा में लगा दिया।

     उ0प्र0 उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के प्रदेश संगठन मंत्री मुकेश रस्तोगी ने कहा कि, गाडगे महराज ने दलितों व गरीबों के बीच अज्ञानता, अंध विश्वास और अस्वच्छता के उन्मूलन के लिए काम किया। पूर्व डीजीसी ओपी यादव ने कहा कि, आज भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर का भरी संसद में अपमान कर यह साबित कर दिया कि, एन.डी.ए. सरकार दलित विरोधी है। इस घटना ने इनका असली चेहरा बेनकाब कर दिया है।  

    स्वर्णकार समाज के संरक्षक भौमेश स्वर्णकार ने कहा कि, संत गाडगे कहते थे कि, मंदिरों में मत जाओं, मूर्तियों की पूजा मत करो, असली संत वही है, जो गरीबों, कमजोरों, अनाथों एवं विकलांगों की सेवा करते हैं।  चंद्रगुप्त मौर्य संस्थान के जिला महामंत्री सुशील मौर्य ने कहा कि, गाडगे महराज का मानना था कि भगवान पत्थरों में नहीं बल्कि इंसानों में है।  

    आई.टी.आई. के श्रमिक नेता श्याम लाल ने कहा कि, संत गाडगे का कीर्तन लोक ज्ञान का अंग था, बाबा कीर्तन के माध्यम से पाखंड को दूर करने की शिक्षा देते थे। गोष्ठी की अध्यक्षता रामशरन चौधरी एवं संचालन कैलाश कनौजिया ने किया।  

      इस अवसर पर राम किसुन निर्मल, रूपचन्द्र यादव, गौरीशंकर, राजेश कुरील, अमर सिंह चौधरी, रामलखन सागर, रोहित चौधरी, श्रीकांत दिवाकर, शास्त्री केदार सोनी, रोहित पटेल, गया प्रसाद, महराजदीन राजवंशी, रामनरेश चौधरी, विशाल चौधरी, कैलाश चन्द्र कनौजिया, आदित्य कनौजिया, धर्मेन्द्र चौधरी, शुभम कनौजिया, गोलू निर्मल, नीरज कनौजिया, आशीष वर्मा, संतोष निर्मल आदि लोगों ने संत गाडगे महराज की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

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