सार........
⭕ जनप्रतिनिधियों और जिम्मदारों की उदासीनता का जीता जागता उदाहरण है ये सड़क…।
⭕ राहगीरों के साथ किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा स्थानीय प्रशासन।
विस्तार.........
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: सड़क मरम्मत व बनाने के नाम पर सरकार हर साल करोड़ों रुपए खर्च करने का दावा करती है, लेकिन तहसील क्षेत्र कोटवा मोहम्दाबाद चौराहे से हिलहा ग्राम पंचायत होते हुए जौन पुर ब्रांच बड़ी नहर को जोड़ने वाली सड़क की दुर्दशा को देखकर तो कुछ ऐसा ही लगता है कि, कई चुनाव गुजर जाने के बाद भी जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन नें समस्याओं को देखने सुनने से तौबा कर लिया हो।
आपको बता दें कि, तस्वीरों को देखकर बता पाना मुश्किल है कि, यहां सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क है, यह साबित करने से पहले ही तस्वीरे शोर मचा रही है। यह सड़क रोजाना राहगीरों के लिए मुसीबत लेकर आती है। कई बाईक सवार तो गिरकर घायल भी हो चुके हैं। सड़क पर बेहिसाब गड्ढे और उस पर बड़े-बड़े बुलडोजर यहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए सबब बन रहें हैं।
डेढ़ किमी. ध्वस्त हो चुकी यह सड़क और सड़क पर बड़े-बड़े बुलडोजर की समस्या से राहगीर पिछले कई बरस से जूझ रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि, सिर्फ़ मूकदर्शक बनकर जूझ रहे हैं बल्कि जिम्मदारों को बकायदा पत्र लिखकर शिकायत भी की गई है।
विभागीय जिम्मेदारों और जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते सड़क से गुजरने वाले लोग हादसे का शिकार हो रहे हैं, बावजूद जिम्मेदारों के कान में जूं तक नहीं रेग रही है। इस सड़क को देखकर ऐसा लगता है कि, समस्या को संज्ञान लेने वाले अधिकारी शायद कुभकर्णीय नींद में है, या फिर उन्हें आम जनता की परेशानियों से कोई मतलब नहीं है, उन्हें तो समय पर तनख्वाह चाहिए।
आसपास गांव के रहने वाले शिव सिंह, सुखपाल, संतोष कुमार चौरसिया, दिलीप कुमार गुप्ता, देशपाल सिंह, अनुज नाई का कहना है कि, उन्हें तो हँसी आती है उस सिस्टम पर, उन जिम्मेदार अधिकारियों पर जो ऐसी ही सड़कों की मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए खर्च करने का दावा करते तो हैं, किंतु धरातल पर सड़कें बदहाल नजर आती हैं और कागजों पर दुरुस्त रहती हैं। वह लोग तो बस भगवान से प्रार्थना करते हैं कि, इस सड़क से गुजरते हुए राहगीरों के साथ कोई बड़ा सड़क हादसा ना हो।
ग्रामीणों ने बताया-बहरहाल लोकसभा चुनाव से पूर्व जनता की समस्या को चुनाव जीत जाने पर हल करने का वायदा करनें वाले जनप्रतिनिधियों, उनके समर्थकों और जिम्मेदार अधिकारियों की नजर शिकायत के बाद भी इस बदहाल जर्जर सड़क पर नहीं पड़ना, उनकी उदासीनता को प्रकट करता है। जरूरत है जिम्मेदारी के निर्वहन की, ताकि जनता को सिस्टम पर भरोसा बना रहे, नहीं तो जनता को आंदोलन की राह पर चलना पड़ेगा।





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