सातवें दिवस की श्रीमद् भागवत कथा: भगवान का 24वां अवतार उ0प्र0 के मुरादाबाद जिले के संभल गांव में होगा-विपिन बिहारी दास जी महराज

 रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: मऊ शर्की गांव में ग्रामीणों के सहयोग से चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें और अंतिम दिन कथा व्यास विपिन बिहारी दास जी महराज ने विभिन्न प्रसंगों पर मार्मिक व्याख्यान किया। उन्होंने सातवें दिवस की कथा में भगवान श्रीकृष्ण की अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया। चारों युगों की आयु, भगवान के तेईस अवतारों की कथा, चौबीसवां अवतार भगवान कहां लेंगे, भामा सुर द्वारा बीस हजार कन्याओं से विवाह के संकल्प की कथा के साथ-साथ भामा सुर द्वारा बंदी बनाई गई सोलह हजार एक सौ आठ कन्याओं को मुक्त कराकर भगवान का उनसे विवाह करने का बड़ा ही मार्मिक प्रसंग एवं सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि, मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा जी से समझा जा सकता है। 

      आपको बता दें कि, कथा व्यास विपिन बिहारी दास जी महराज ने कहा कि, सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र कृष्ण से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। सुदामा ने द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे, लेकिन द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि, वह कृष्ण के मित्र हैं, इसपर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि, कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है।

     महराज ने कहा कि, जैसे ही द्वारपाल के मुंह से भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा का नाम सुना, सुदामा-सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। सामने सुदामा सखा को देखकर भगवान ने सुदामा को अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर गले लगाया। दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण ने सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। कथा व्यास विपिन बिहारी दास जी महराज ने बताया कि, जब भी भक्तों पर विपदा आई है। प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं।

      श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस की कथा में व्यास विपिन बिहारी दास जी महाराज ने बड़ा ही मार्मिक चारों युगों कलयुग, द्वापर, त्रेता, एवं सतयुग का प्रसंग सुनाया। महाराज जी ने कलयुग की आयु 4,25 हजार वर्ष, द्वापर की आयु 8,64 हजार वर्ष, त्रेता युग की आयु 12 लाख 96 हजार वर्ष और सतयुग की आयु 17 लाख 28 हजार वर्ष बताया है। उन्होंने बताया कि, भगवान के 24 अवतारों में 23 अवतार हो चुके हैं और 24वां अवतार उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्थित संभल गांव में होगा, जिसका उल्लेख श्रीमद् भागवत कथा में पाया जाता है।

     कथा व्यास विपिन बिहारी दास जी महाराज ने भामा सुर का संकल्प 20 हजार कन्याओं के साथ विवाह करने का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि, भामा सुर जिस भी राज्य में आक्रमण करने जाता था वहां की सुंदरियों को पकड़ कर जेल में डाल देता था, जिससे 16108 कन्याएं उसके कब्जे में आ गई थी। जब भगवान श्री कृष्ण को यह बात पता चली तो भगवान ने भामा-सुर का संघार कर कन्याओं को बंदीगृह से आजाद कराया। कन्याओं ने भगवान से प्रश्न किया कि, अब वह कहां जाए? जिस पर भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि, वह सब अपने-अपने घर जाएं। कन्याओं का जवाब था कि, वे सब अपने-अपने घर नहीं जाएगी, अब उनके पास सिर्फ तीन रास्ते हैं। पहले रास्ता है आत्महत्या करना, दूसरा रास्ता वह सब वैश्या बन जाए और तीसरा रास्ता भगवान उनके साथ विवाह कर ले। कन्याओं के विवाह प्रस्ताव पर भगवान ने तथास्तु कह दिया।

    कथा व्यास ने बताया कि, भगवान श्री कृष्ण ने पहले आठ विवाह किए, उसके बाद में श्रीकृष्णा ने 16 हजार 100 विवाह किए। 

     कथा व्यास ने सातवें दिवस की की श्रीमद् भागवत कथा के व्याख्यान में बाणासुर की पुत्री ऊषा और प्रद्युमन के पुत्र अनिरुद्ध की मार्मिक कथा सुनाई। महाराज जी ने बताया कि, बाणासुर की पुत्री ऊषा को स्वप्न में अनिरुद्ध दिखाई दिए, जिस पर वह मोहित हो गई। बाणासुर की पुत्री ने अनिरुद्ध को प्राप्त करने के लिए अपनी सखी चित्रलेखा को बुलाया और स्वप्न का सारा वृत्तांत बताया। चित्रलेखा ने कहा- बहन तुम चिंता ना करो, मैं अनिरुद्ध को सोते सहित यहां ले आऊंगी। मायावी चित्रलेखा आकाश मंडल से उड़ते हुए द्वारिका पहुंची, किन्तु वहां सुदर्शन चक्र द्वारिका की रखवाली कर रहा था, उसने चित्रलेखा को द्वार पर ही रोक लिया, तब चित्रलेखा ने सुदर्शन को भी सारा वृत्तांत बताया। सुदर्शन ने चित्रलेखा को अंदर जाने की आज्ञा दे दी। मायाबी चित्रलेखा ने अंदर जाकर सोते हुए अनिरुद्ध को उठा लिया और बाणासुर के महल में जहां ऊषा सो रही थी उन्हीं के बगल में लेटा दिया।

      जब ऊषा की नींद खुली तो उन्होंने अनिरुद्ध को देखा और मोहित हो गई और जब अनिरुद्ध की नींद खुली तब वह ऊषा को देखकर मोहित हो गए। इसके बाद दोनों ने आपस में गंधर्वरीति से विवाह कर लिया।

     मऊ शर्की गांव में चल रही सात दिवसीय कथा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। अंत में भागवत भगवान की आरती की गई तत्पश्चात प्रसाद वितरण का कार्यक्रम संपन्न हुआ।

      सातवें दिवस की श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर पंडित राम सरन शास्त्री ने विधिवत हवन, पूजन, आरती करवाया, तत्पश्चात प्रसाद वितरण का कार्यक्रम संपन्न हुआ। कथा में शेखर मिश्रा (ढोलक), सुधीर मिश्रा (कीबोर्ड) ने अपने-अपने वाद्ययंत्रों से भक्तिमय गीतों पर शमा बांध दिया, जिससे पंडाल में बैठे श्रद्धालु घूमने लगे।

     सातवें दिवस के मुख्य यजमान पूर्व प्रमुख सत्येंद्र प्रताप सिंह, रमेश सिंह, राम शंकर सोनी, विनय गुप्ता, वासुदेव यादव सपत्निक समेत ग्रामवासी श्रद्धालु पूजन के मुख्य यजमान रहे। पूजन का सभी कार्य पंडित रामशरन शास्त्री द्वारा विधिवत कराया गया। कथा स्थल पर यजमानों साहित्य कई गणमान्य अतिथियों ज्योति प्रकाश अवस्थी एडवोकेट, लवलेश पांडेय प्रधानाध्यापक, राधेश्याम तिवारी, महेंद्र प्रताप सिंह, राजेश सिंह, विजय मिश्रा, श्याम भवन सिंह चौहान, रमेश सिंह, राजेंद्र सिंह, अंजनी गुप्ता प्रधान, सियाराम यादव, जितेंद्र जायसवाल, चंद्रचूड़ नाई, रामसनेही मौर्य ने अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज करवाई।

     इस मौके पर शिव दीन, बेचू, रामसागर साहू, लाल बहादुर, रामदेव, लवकेश मौर्य, रामू, दीपू यादव, राम मनोहर, कमलेश मौर्य, रामचरन, आदित्य प्रताप, बाबा दीन, गुरचरण भारत लाल, गंगा प्रसाद, राम शंकर मौर्य, राम प्रसाद गुप्ता, छोटे बाबू, छोटेलाल, दयाशंकर रमाशंकर सोनी राजेश सोनी राम प्रसाद मौर्य राजकुमार मौर्य संतलाल मौर्य जगजीवन राम लखन मौर्य वंशी लाल आदि पंडाल में उपस्थित रहकर श्रीमद् भागवत कथा का रसास्वादन किया।

     बुधवार को विद्वान पंडितों द्वारा हवन पूजन आरती के पश्चात श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जो प्रभु इच्छा तक चलता रहा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण किया।

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