श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुन श्रोता हुए मंत्रमुग्ध।। Raebareli news ।।

कथा का रसपान करने के लिए उमड़ता है आस्था का सैलाब
रजनीकांत अवस्थी
शिवगढ़,रायबरेली: शिवगढ़ क्षेत्र के पिपरी गांव में सेवानिवृत्त शिक्षक गोविंद नारायण शुक्ला के आवास प्रांगण में बीती 27 जनवरी से चल रही 7 दिवसीय संगीतमयी श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ में चौथे दिन कथावाचक राधेश्याम शास्त्री जी ने अपनी दिव्य वाणी से अमृतयी वर्षा करते हुए 'श्री कृष्ण जन्मोत्सव' का बड़ा ही सुंदर और मार्मिक वर्णन किया। कथा वाचन करते हुए राधेश्याम शास्त्री जी ने कहा कि, जब ब्रम्ह बालक बन जाए, अदृश्य दृश्य बन जाए, पिता जब पुत्र बन जाए, स्वामी सेवक बन जाए, सबका नाथ अपना बन जाए तो मान लीजिए प्रभु ने किसी ना किसी रूप में जन्म ले लिया है।
     आपको बता दें कि, श्री शास्त्री जी ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म पर श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते हुए कहा कि, नदिया तो सागर से मिलने जाती हैं लेकिन जब सागर नदियों से मिलने जाए तो मान लीजिए प्रभु ने अवतार ले लिया है। जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ता है तब तक प्रभु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पापियों का संहार करते हैं। द्वापर युग में ऐसे ही क्रांतिकारी घटना घटी जब भगवान श्री कृष्ण ने अपने भक्तों से मिलने एवं पापी कंस का संहार करने के लिए पृथ्वी पर जन्म लिया था। श्री कृष्ण जन्मोत्सव कथा सुन श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर करतल ध्वनि के साथ राधे-राधे के जयकारे लगाने लगे।
        विदित हो कि, कथावाचक राधेश्याम शास्त्री जी महराज अयोध्या धाम के संत शिरोमणि श्री श्री 108 श्री महंत नृत्य गोपालदास जी महराजगंज के शिष्य हैं। जो अपनी दिव्य वाणी से अमृतमयी वर्षा कर रहे हैं। यहां सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में प्रतिदिन सायं 6 से 9 तक आयोजित कथा का रसपान करने के लिए श्रोताओं का जनसैलाब उमड़ रहा है।
     इस संगीतमयी श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन मधू शुक्ला एवं सेवानिवृत्त शिक्षक गोविंद नारायण शुक्ला द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में व्यवस्थापक की मुख्य भूमिका राजकुमार शुक्ला निभा रहे हैं। 

      इस मौके पर मुख्य यजमान केश शुक्ला, विजय नारायण शुक्ला, महेश शुक्ला, मीना शुक्ला, पिपरी प्रधान अनुपमा तिवारी, सुनील शुक्ला, नंदकिशोर तिवारी, सीमा शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ला, नमिता, शैलेश, अर्पणा, राकेश बाबू तिवारी, ललित, रितेश, शिशिर, सौरभ, ऋषभ, आर्यन, आर्यव, ललित तिवारी, रामदेव अवस्थी सहित हजारों की संख्या में श्रोता गण मौजूद रहे।
                          रजनीकांत अवस्थी

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