होली : रंग में भंग डालने से बचना एवं क्या न करे, इस पर विचार जरूरी

खोआ, रंग तथा पालीथीन बेचने वालों से शपथ पत्र लेना भी आवश्यक !---
मिर्जापुर। होली पर हर क्षेत्र में शांति व्यवस्था के इरादे से पीस कमेटियों की बैठकें हो रही हैं । इन बैठकों में निम्नांकित सुझाव दिया जाना चाहिए । इन बैठकों में थोक एवं फुटकर खोआ, रंग, पालीथीन बेचने वाले व्यापारियों को भी बुलाया जाना चाहिए तथा उनसे शपथ पत्र लेना चाहिए ।
क्या न करें ?--
1-होलिका में कूड़ा-करकट, टायर-ट्यूब डालने से बचना चहिए। इससे आसपास के साथ पूरा पर्यावरण नष्ट होता है।  प्रकृति में परिवर्तन । प्राकृतिक संसाधनों को भी देवी-देवता कहा गया है ।
2- अपशब्दों के इस्तेमाल से । जिह्वा पर माता सरस्वती रहती हैं । अपशब्द जिह्वा का कूड़ा-करकट होते हैं । माता सरस्वती को पीड़ा होती है ।
3- केमिकल युक्त रंगों के प्रयोग पर प्रतिबंध होना चाहिए।     4-पाउच (पालीथीन) का प्रयोग सरकार द्वारा प्रतिबंधित है ।
     5-पाउच में रंग से सीवर (नाली) जाम । बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं से स्वास्थ्य पर असर ।
6- होलिका जलाने के लिए बलपूर्वक धनवसूली नहीं होना चाहिए । 
7-होली के चलते दुश्मनी न भजाएँ । किसी की संपत्ति नष्ट नहीं करना चाहिए।
8-तेज आवाज में डीजे बजाकर डांस करने से आवागमन बाधित होता है ।
9-नशीली वस्तु का सेवन कर होली खेलने न निकले । इससे मारपीट की संभावना रहती है ।
10-राह चलती महिलाओं पर रंग न डालें ।
11-छोटे बच्चे भूलवश रंग डाल दें तो उत्तेजित होना उचित नहीं ।
12-बिजली के तार के नीचे एवं ट्रांसफार्मर के पास होलिका नहीं जलाना चाहिए ।
                       -सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।

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