महापुरुष श्रीराम एवं श्रीकृष्ण लड़े, भागे नहीं
मृत्यु के देवता यमराज का अस्तित्व सृष्टि के प्रारंभ-काल से ही रहा है । सत्ययुग हो, त्रेता-द्वापर रहा हो, प्रतापी से प्रतापी राजे-महाराजे यमराज के चंगुल से बच नहीं पाए फिर यह तो कलियुग है । मृत्यु के देवता कहें या दूत कहें, के कोरोना रूपी दूत का आतंक पूरी दुनियां में दिखाई पड़ रहा है ।
सत्ययुग का मधुकैटभ, त्रेता का रावण, द्वापर का कंस-सब कोरोना जैसे ?---
सत्ययुग में रचना के देवता ब्रह्मा को कोरोना रूपी मधुकैटभ अपने चपेट में लेने के लिए उद्यत हुआ। वर्तमान में जो कोरोना है उसी का नाम उस काल में मधुकैटभ पड़ा होगा । क्योंकि दोनों की प्रवृत्ति एक जैसी है कि जिन्दे को मुर्दे में बदल देना । तत्काल नारायण की अध्यक्षता में आपात बैठक हुई और कोरोना रूपी मधुकैटभ से लड़ने का काम मां दुर्गा के जिम्मे आया । वह कोरोना कभी महिषासुर, कभी शुंभ-निशुंभ तो कभी चन्ड-मुंड और कभी रक्तबीज को भेजता यमदूत बनाकर । लेकिन मां दुर्गा भी पीछे हटने को तैयार नहीं । कभी मां काली बनकर तो कभी शूलधरणी तो श्रीदुर्गासप्तशती में वर्णित 108 नामों के रूप में तथा कवच अध्याय के विविध गुणों वाली मां बनकर जन जन की रक्षा करती रहीं ।
श्रीराम और श्री कृष्ण भागे नहीं बल्कि कूदे मैदाने-जंग में---
श्रीराम को खबर मिली की लंका में विद्यमान लंकिनी-पिशाचिनी रूपी कोरोना के बल पर चतुर्दिक आतंक मचा हुआ है । पर्यावरण नष्ट किया जा रहा है । ऋषियों-मुनियों के यज्ञ-हवन नहीं हो पा रहे हैं तो श्रीराम को चैन कहा ? मुख्य डॉक्टर बने और अपने सहयोग में महिला चिकित्सक माता सीता तथा लैब चिकित्सक लक्ष्मण को लेकर निकल पड़े इलाज के लिए । यही काम द्वापर में कोरोना प्रवृत्ति के कन्स के खिलाफ श्रीकृष्ण बाल-चिकित्सक बन कूदे । जहरीली पूतना, प्रलम्बासुर, अघासुर, व्योमासुर यहां तक कि जल को प्रदूषित करने वाले कालिया नाग का बध कर डाला ।
कलियुग के वर्तमान 28वें चरण का हाल बेहाल है---
उक्त दृश्य और वर्तमान दृश्य में फर्क है । सामान्य दिनों में VVIP बनने वाले, सैल्यूट-सलामी लेने वाले, लाल-नीली बत्ती वाले सबसे पहले अपनी जान बचाकर दुबकते दिख रहे हैं । रक्षक 'डरपोकी-लाल' बना हुआ । सीना दिखाने वाले पीठ दिखा रहे हैं । जो पीठ दिखा रहा है, उनसे क्या भरोसा किया जाए ?
सन्देश--
कोरोना की कहानी से यह निष्कर्ष निकल रहा है कि सात्विक और पवित्र खान-पान, चिंतन रखा जाए । हर वस्तु में मिलावट कर व्यक्ति लाभ कमाने की कोशिश इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा) तंत्र को कमजोर करेगी ।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
©कॉपीराइट एक्ट का उल्लंघन दण्डनीय । अतः नाम एडिट कर प्रयोग करना अनुचित होता है ।
मृत्यु के देवता यमराज का अस्तित्व सृष्टि के प्रारंभ-काल से ही रहा है । सत्ययुग हो, त्रेता-द्वापर रहा हो, प्रतापी से प्रतापी राजे-महाराजे यमराज के चंगुल से बच नहीं पाए फिर यह तो कलियुग है । मृत्यु के देवता कहें या दूत कहें, के कोरोना रूपी दूत का आतंक पूरी दुनियां में दिखाई पड़ रहा है ।
सत्ययुग का मधुकैटभ, त्रेता का रावण, द्वापर का कंस-सब कोरोना जैसे ?---
सत्ययुग में रचना के देवता ब्रह्मा को कोरोना रूपी मधुकैटभ अपने चपेट में लेने के लिए उद्यत हुआ। वर्तमान में जो कोरोना है उसी का नाम उस काल में मधुकैटभ पड़ा होगा । क्योंकि दोनों की प्रवृत्ति एक जैसी है कि जिन्दे को मुर्दे में बदल देना । तत्काल नारायण की अध्यक्षता में आपात बैठक हुई और कोरोना रूपी मधुकैटभ से लड़ने का काम मां दुर्गा के जिम्मे आया । वह कोरोना कभी महिषासुर, कभी शुंभ-निशुंभ तो कभी चन्ड-मुंड और कभी रक्तबीज को भेजता यमदूत बनाकर । लेकिन मां दुर्गा भी पीछे हटने को तैयार नहीं । कभी मां काली बनकर तो कभी शूलधरणी तो श्रीदुर्गासप्तशती में वर्णित 108 नामों के रूप में तथा कवच अध्याय के विविध गुणों वाली मां बनकर जन जन की रक्षा करती रहीं ।
श्रीराम और श्री कृष्ण भागे नहीं बल्कि कूदे मैदाने-जंग में---
श्रीराम को खबर मिली की लंका में विद्यमान लंकिनी-पिशाचिनी रूपी कोरोना के बल पर चतुर्दिक आतंक मचा हुआ है । पर्यावरण नष्ट किया जा रहा है । ऋषियों-मुनियों के यज्ञ-हवन नहीं हो पा रहे हैं तो श्रीराम को चैन कहा ? मुख्य डॉक्टर बने और अपने सहयोग में महिला चिकित्सक माता सीता तथा लैब चिकित्सक लक्ष्मण को लेकर निकल पड़े इलाज के लिए । यही काम द्वापर में कोरोना प्रवृत्ति के कन्स के खिलाफ श्रीकृष्ण बाल-चिकित्सक बन कूदे । जहरीली पूतना, प्रलम्बासुर, अघासुर, व्योमासुर यहां तक कि जल को प्रदूषित करने वाले कालिया नाग का बध कर डाला ।
कलियुग के वर्तमान 28वें चरण का हाल बेहाल है---
उक्त दृश्य और वर्तमान दृश्य में फर्क है । सामान्य दिनों में VVIP बनने वाले, सैल्यूट-सलामी लेने वाले, लाल-नीली बत्ती वाले सबसे पहले अपनी जान बचाकर दुबकते दिख रहे हैं । रक्षक 'डरपोकी-लाल' बना हुआ । सीना दिखाने वाले पीठ दिखा रहे हैं । जो पीठ दिखा रहा है, उनसे क्या भरोसा किया जाए ?
सन्देश--
कोरोना की कहानी से यह निष्कर्ष निकल रहा है कि सात्विक और पवित्र खान-पान, चिंतन रखा जाए । हर वस्तु में मिलावट कर व्यक्ति लाभ कमाने की कोशिश इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा) तंत्र को कमजोर करेगी ।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
©कॉपीराइट एक्ट का उल्लंघन दण्डनीय । अतः नाम एडिट कर प्रयोग करना अनुचित होता है ।


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