'अपूज्या यत्र पूज्यंते, पूजनीयो न पूज्यते ।
त्रीणि तत्र भविष्यन्ति, दुर्भिक्षो मरणं भयं ।।
-स्कन्द पुराण, माहेश्वर खण्ड-केदारखण्ड, 3/48-49
(जहाँ अपूज्य व्यक्तियों का पूजन होता है तथा पूजनीय लोगों का पूजन नहीं किया जाता, वहाँ दुर्भिक्ष, मृत्यु तथा भय ये तीन संकट अवश्य आते हैं ।
यह प्रसंग सती के अग्निकुंड में प्राणत्याग से भगवान शंकर के क्रोध से उत्पन्न भयंकर विपत्तियों के सन्दर्भ में कहा गया है ।
त्रीणि तत्र भविष्यन्ति, दुर्भिक्षो मरणं भयं ।।
-स्कन्द पुराण, माहेश्वर खण्ड-केदारखण्ड, 3/48-49
(जहाँ अपूज्य व्यक्तियों का पूजन होता है तथा पूजनीय लोगों का पूजन नहीं किया जाता, वहाँ दुर्भिक्ष, मृत्यु तथा भय ये तीन संकट अवश्य आते हैं ।
यह प्रसंग सती के अग्निकुंड में प्राणत्याग से भगवान शंकर के क्रोध से उत्पन्न भयंकर विपत्तियों के सन्दर्भ में कहा गया है ।
-सलिल पाण्डेय, मिर्जापुर ।


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