अबीर में बालू, रंगों में केमिकल तथा पाउच की सज रही दुकानें----
मिर्जापुर । रंगों का पर्व होली उल्लास एवं उमंग के लिए आता है लेकिन अमीर बनने की लालच में स्वास्थ्य पर डाका डालने की चली आ रही आदतों के मुताबिक मिलावटी अबीर-गुलाल, चेहरे एवं शरीर में जलन पैदा करने वाले रंगों से बाजार पटने लगा है ।
पिचकारी गायब---
होली पर पिचकारी से रंग डालने की प्रवृति खत्म होती जा रही । छोटी उम्र के बच्चे प्लास्टिक के मेड इन चाइना की पिचकारी से जरूर खेलते हैं लेकिन बड़ी उम्र के लोग स्मार्ट बनने के लिए पाउच-कल्चर अपनाने लगे हैं । नशे के लिए पाउच और रंग-बाजी के लिए पाऊच । पाऊचमय हो गई है होली ।
जितना चाहें मिल जाएगा पाउच---
नगर में पक्की सराय एवं मुकेरी बाजार, टटहाई रोड एवं मुकेरी बाजार में जितना चाहें पाउच उपलब्ध हो जाएगा । इन पाउचों में लोग रंग भरकर राह चलते लोगों पर तेजी से फेंकते हैं, जिससे कभी कभी आंखों में जाकर सीधे पाउच लगता है और राहगीर को नेत्र चिकित्सक की शरण में जाना पड़ता है ।
घण्टाघर और मुकेरीबाजार नकली रंगों का बाजार---
उक्त दोनों बाजारों में सड़क किनारे बैठकर खुलेआम नकली रंग की दुकानें रंगभरी एकादशी से शुरू हो जाती हैं । केवल सड़क पर बैहकर ही नहीं बल्कि छोटी-बड़ी दुकानों में भी असली रंग बड़ी मुश्किल से मिल पाएगा । होली की शाम लोग जिस अबीर को एक दूसरे को लगाते हैं, उसमें बालू मिला रहता है । इसके अलावा कुछ लोग जो इत्र भी एक दूसरे को लगाते हैं, वह भी केमिकल युक्त आ रहा है जिसे शरीर पर लगाते ही विपरीत असर तत्काल दिखने लगता है ।
खोआ मंडी भी नकली से पटा है,
प्रशासनिक धमक की जरूरत---
बिना प्रशासनिक धमक के नकली बाजार पर असर पड़ने वाला नहीं । कुछ साल पहले तत्कालीन एसपी श्री अरविंद सेन खुद नगर परिक्रमा कर नकली रंग बिक्रेताओं की खोज खबर जब ली तो अफरातफरी मची थी ।
अपीलयुक्त तथा एक्शन के साथ हो रूटमार्च---
शांति व्यवस्था के लिए होने वाले रूटमार्च में लाउडस्पीकर से नकली सामानों की बिक्री पर कार्रवाई की चेतावनी भी हो । जगह जगह रुककर सैमपुलिंग भी हो । थाना स्तर पर बैठकों में सम्बंधित दुकानदारों को भी पाबंद किया जाए । सिर्फ मीडिया में अपील से काम चलने वाला नहीं ।
मिर्जापुर । रंगों का पर्व होली उल्लास एवं उमंग के लिए आता है लेकिन अमीर बनने की लालच में स्वास्थ्य पर डाका डालने की चली आ रही आदतों के मुताबिक मिलावटी अबीर-गुलाल, चेहरे एवं शरीर में जलन पैदा करने वाले रंगों से बाजार पटने लगा है ।
पिचकारी गायब---
होली पर पिचकारी से रंग डालने की प्रवृति खत्म होती जा रही । छोटी उम्र के बच्चे प्लास्टिक के मेड इन चाइना की पिचकारी से जरूर खेलते हैं लेकिन बड़ी उम्र के लोग स्मार्ट बनने के लिए पाउच-कल्चर अपनाने लगे हैं । नशे के लिए पाउच और रंग-बाजी के लिए पाऊच । पाऊचमय हो गई है होली ।
जितना चाहें मिल जाएगा पाउच---
नगर में पक्की सराय एवं मुकेरी बाजार, टटहाई रोड एवं मुकेरी बाजार में जितना चाहें पाउच उपलब्ध हो जाएगा । इन पाउचों में लोग रंग भरकर राह चलते लोगों पर तेजी से फेंकते हैं, जिससे कभी कभी आंखों में जाकर सीधे पाउच लगता है और राहगीर को नेत्र चिकित्सक की शरण में जाना पड़ता है ।
घण्टाघर और मुकेरीबाजार नकली रंगों का बाजार---
उक्त दोनों बाजारों में सड़क किनारे बैठकर खुलेआम नकली रंग की दुकानें रंगभरी एकादशी से शुरू हो जाती हैं । केवल सड़क पर बैहकर ही नहीं बल्कि छोटी-बड़ी दुकानों में भी असली रंग बड़ी मुश्किल से मिल पाएगा । होली की शाम लोग जिस अबीर को एक दूसरे को लगाते हैं, उसमें बालू मिला रहता है । इसके अलावा कुछ लोग जो इत्र भी एक दूसरे को लगाते हैं, वह भी केमिकल युक्त आ रहा है जिसे शरीर पर लगाते ही विपरीत असर तत्काल दिखने लगता है ।
खोआ मंडी भी नकली से पटा है,
प्रशासनिक धमक की जरूरत---
बिना प्रशासनिक धमक के नकली बाजार पर असर पड़ने वाला नहीं । कुछ साल पहले तत्कालीन एसपी श्री अरविंद सेन खुद नगर परिक्रमा कर नकली रंग बिक्रेताओं की खोज खबर जब ली तो अफरातफरी मची थी ।
अपीलयुक्त तथा एक्शन के साथ हो रूटमार्च---
शांति व्यवस्था के लिए होने वाले रूटमार्च में लाउडस्पीकर से नकली सामानों की बिक्री पर कार्रवाई की चेतावनी भी हो । जगह जगह रुककर सैमपुलिंग भी हो । थाना स्तर पर बैठकों में सम्बंधित दुकानदारों को भी पाबंद किया जाए । सिर्फ मीडिया में अपील से काम चलने वाला नहीं ।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।


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