ब्रह्मांड की मातृ शक्ति पीठ विंध्यवासिनी धाम से महिला दिवस के सम्मानार्थ

महिला वर्ग के सम्बोधनों का अर्थ-
1- महिला- मह धातु में इलच प्रत्यय लग कर यह शब्द बना । मह का अर्थ महनीय, पूजनीय। इसी से महत्व,महंथ आदि शब्द।
2-नारी- नृत से बना ।नृत यानि नृत्य । कार्य करते समय जो न्रत्य करे। इसी से नर बना।
3-माता- मान शब्द से माता । जो माननीया हो । दूसरा निर्मातृ से भी मतलब ।
4-अबला- जो अशक्त हो बलमें शारीरिक रूप से लेकिन मानसिक बल में अच्छी हो।
5-वामा- जो विलोम भाव में रहती हो । बच्चे को सूखे में खुद गीले में सोती है । खाना नही खाए रहती लेकिन सबको खिला देती हो।
6- सुन्दरी- सु+उन्द- गीला करना । उसे देख कर पुरुष का हृदय गीला यानि लचीला होता है ।
7-मानिनी-सम्मान की चाह । वह रूठे तो कोई मनाए ।
8-दुहिता- कई अर्थ-दुत्कार से भी । इसी से अंग्रेजी का डाटर बना । दुहने का भी अर्थ । प्रचीन काल में लडकिया गाय दुहती थी । गाय के थन में स्पर्श करते ही गाय शरीर में क्षति हुए रक्त, विटामिन को दूध में बढ़ा देती है । सिर्फ देशी गाय यह करती है ।
मातृ शक्ति के सम्मान से माँ लक्षमी प्रसन्न होती हैं । नारी के चरण में लक्षमी का निवास । रामकृष्ण परमहंस के इसी भाव से माँ काली प्रकट हो गयी।
                     -सलिल पाण्डेय, मिर्जापुर ।
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