रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: बेमौसम बरसात की बात तो समझ में आती है, लेकिन बे मौसम बरसात के साथ-साथ बेमौसम ओले भी गिरे तो इसे क्या कहा जाए। यही वाक्या महराजगंज क्षेत्र में आज अपरान्ह घटित हुआ। जबकि तेज बारिश के साथ साथ बड़े-बड़े ओले भी गिरे जिनसे खेतों में खड़ी सरसों की फसल के साथ-साथ गेहूं की फसल भी काफी क्षतिग्रस्त हो गई और किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गई। बारिश और ओले थमने के बाद भी चल रही तेज हवाओं से अब यह भी खतरा पैदा हो गया है की खड़ी फसल है कहीं खेतों में गिर ना जाए। आज लगभग 4:00 बजे से गहरे काले भूरे बादल अचानक उमड़ घुमड़ कर आसमान में छा गए। बादलों से बिजली कड़कने की आवाज शुरू हुई और देखते ही देखते बारिश शुरू हो गई। साथ ही जमकर 15 से 20 मिनट तक ओले भी गिरे और पूरी जमीन पर सफेदी सी छा गई।
खास बात यह रही कि, ओले के गिरने का दायरा शिवगढ़ क्षेत्र से शुरू होकर महराजगंज के बावन बुजुर्ग बल्ला ,ओथी ,टुक हसनपुर,कस्बा महराजगंज अतरेहटा,कैर, जिहवा, पाली, पोखरनी आदि गांव में ज्यादा रहा जबकि, रायबरेली रोड पर सडकहा पुरवा से आगे एक बूंद भी नहीं गिरा। मोटे अनुमान के मुताबिक लगभग दो दर्जन गांव में सैकड़ों बीघे सरसों और गेहूं की फसलें क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे हजारों किसान प्रभावित हुए हैं।
क्षेत्र के पाली गांव के प्रगतिशील किसान और पूर्व एडीओ कृषि रामप्यारे सिंह का कहना है कि, अधिकतर सरसो की फसलों में फूल आ गए थे। ओलों की मार से सारी फूल बेकार हो गए। प्रभावित क्षेत्रों में सरसों की उपज पर बड़ा बुरा असर पड़ेगा।
वहीं पारियावां के रहने वाले बुधई पासी का कहना है कि, गेहूं की फसलों को भी जिन में बालियां निकल रही थी उनको काफी नुकसान हुआ है। अतरेहटा के चंद्रशेखर शुक्ला का मानना है कि, फसलों को जो नुकसान हुआ वह हुआ, आगे अगर तेज हवाएं चलना बंद नहीं हुई तो गेहूं की खड़ी फसल खेतों में लेट जाएगी।
इसी प्रकार कैर के गंगाराम पासी, पूरे मूडू के रामकुमार आदि भी फसलों में नुकसान हो जाने से काफी दुखी है।
महराजगंज/रायबरेली: बेमौसम बरसात की बात तो समझ में आती है, लेकिन बे मौसम बरसात के साथ-साथ बेमौसम ओले भी गिरे तो इसे क्या कहा जाए। यही वाक्या महराजगंज क्षेत्र में आज अपरान्ह घटित हुआ। जबकि तेज बारिश के साथ साथ बड़े-बड़े ओले भी गिरे जिनसे खेतों में खड़ी सरसों की फसल के साथ-साथ गेहूं की फसल भी काफी क्षतिग्रस्त हो गई और किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गई। बारिश और ओले थमने के बाद भी चल रही तेज हवाओं से अब यह भी खतरा पैदा हो गया है की खड़ी फसल है कहीं खेतों में गिर ना जाए। आज लगभग 4:00 बजे से गहरे काले भूरे बादल अचानक उमड़ घुमड़ कर आसमान में छा गए। बादलों से बिजली कड़कने की आवाज शुरू हुई और देखते ही देखते बारिश शुरू हो गई। साथ ही जमकर 15 से 20 मिनट तक ओले भी गिरे और पूरी जमीन पर सफेदी सी छा गई।
खास बात यह रही कि, ओले के गिरने का दायरा शिवगढ़ क्षेत्र से शुरू होकर महराजगंज के बावन बुजुर्ग बल्ला ,ओथी ,टुक हसनपुर,कस्बा महराजगंज अतरेहटा,कैर, जिहवा, पाली, पोखरनी आदि गांव में ज्यादा रहा जबकि, रायबरेली रोड पर सडकहा पुरवा से आगे एक बूंद भी नहीं गिरा। मोटे अनुमान के मुताबिक लगभग दो दर्जन गांव में सैकड़ों बीघे सरसों और गेहूं की फसलें क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे हजारों किसान प्रभावित हुए हैं।
क्षेत्र के पाली गांव के प्रगतिशील किसान और पूर्व एडीओ कृषि रामप्यारे सिंह का कहना है कि, अधिकतर सरसो की फसलों में फूल आ गए थे। ओलों की मार से सारी फूल बेकार हो गए। प्रभावित क्षेत्रों में सरसों की उपज पर बड़ा बुरा असर पड़ेगा।
वहीं पारियावां के रहने वाले बुधई पासी का कहना है कि, गेहूं की फसलों को भी जिन में बालियां निकल रही थी उनको काफी नुकसान हुआ है। अतरेहटा के चंद्रशेखर शुक्ला का मानना है कि, फसलों को जो नुकसान हुआ वह हुआ, आगे अगर तेज हवाएं चलना बंद नहीं हुई तो गेहूं की खड़ी फसल खेतों में लेट जाएगी।
इसी प्रकार कैर के गंगाराम पासी, पूरे मूडू के रामकुमार आदि भी फसलों में नुकसान हो जाने से काफी दुखी है।

0 टिप्पणियाँ