कोरोना मरीजो की बढ़ती संख्या से भय का माहौल
लापरवाही नही जागरूकता बहुत आवश्यक
महराजगंज/रायबरेली: पहले दो फिर तैतीस और फिर आठ कोरोना पॉजिटिव मामले की रिपोर्ट आने के बाद शहर के खालिसहाट, क़िलाबजार, कहारों का अड्डा सहित बछरावां, थुलेंडी, रसूलपुर, रोहनिया, महराजगंज आदि ग्रामीण इलाके भी हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित किये गए।
आपको बता दें कि, महराजगंज क्षेत्र सहित अलग-अलग इलाको से 43 पॉजिटिव मामले पाए जाने के बाद बड़ा प्रश्न यह है कि, यह 43 पॉजिटिव कितने लोगो के प्रथम व द्वितीय चरण में सम्पर्क में रहे। बाहर से आये जमातियों को किन लोगों ने संरक्षण व शरण देकर उनको लगातार भूमिगत रखने में भूमिका निभाई, यह सब सोचकर आम आदमी भयभीत है। जिस प्रश्न का उत्तर कही से नही प्राप्त हो रहा है।
एक प्रश्न यह भी है कि, अभी तक पॉजिटिव पाए गए सभी लोग पिछले 14 दिनों से ज्यादा संस्थागत क्वारन्टीन केंद्रों में मेडिकल स्टाफ की देखरेख में है। उपरोक्त की पहली रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद दूसरी रिपोर्ट पॉजिटव आयी है, जिससे लोगो में भय का वातावरण है।
प्रशसनिक मशीनरी को जमातियों के सम्पर्क में आये लोगो का गम्भीरता से पता लगाकर उनकी थर्मल स्कैनिंग से लेकर सैम्पलिंग तक करना चाहिये। मेडिकल वैज्ञानिकों का मानना है कि, कोरोना एक ऐसा वायरस है, जो स्ट्रांग इम्युनिटी वालो में जल्दी पता लगाना मुश्किल है, थोड़ी लापरवाही से कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है, इसके लिये अब सचेत होंना आवश्यक है।
लापरवाही नही जागरूकता बहुत आवश्यक
महराजगंज/रायबरेली: पहले दो फिर तैतीस और फिर आठ कोरोना पॉजिटिव मामले की रिपोर्ट आने के बाद शहर के खालिसहाट, क़िलाबजार, कहारों का अड्डा सहित बछरावां, थुलेंडी, रसूलपुर, रोहनिया, महराजगंज आदि ग्रामीण इलाके भी हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित किये गए।
आपको बता दें कि, महराजगंज क्षेत्र सहित अलग-अलग इलाको से 43 पॉजिटिव मामले पाए जाने के बाद बड़ा प्रश्न यह है कि, यह 43 पॉजिटिव कितने लोगो के प्रथम व द्वितीय चरण में सम्पर्क में रहे। बाहर से आये जमातियों को किन लोगों ने संरक्षण व शरण देकर उनको लगातार भूमिगत रखने में भूमिका निभाई, यह सब सोचकर आम आदमी भयभीत है। जिस प्रश्न का उत्तर कही से नही प्राप्त हो रहा है।
एक प्रश्न यह भी है कि, अभी तक पॉजिटिव पाए गए सभी लोग पिछले 14 दिनों से ज्यादा संस्थागत क्वारन्टीन केंद्रों में मेडिकल स्टाफ की देखरेख में है। उपरोक्त की पहली रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद दूसरी रिपोर्ट पॉजिटव आयी है, जिससे लोगो में भय का वातावरण है।
प्रशसनिक मशीनरी को जमातियों के सम्पर्क में आये लोगो का गम्भीरता से पता लगाकर उनकी थर्मल स्कैनिंग से लेकर सैम्पलिंग तक करना चाहिये। मेडिकल वैज्ञानिकों का मानना है कि, कोरोना एक ऐसा वायरस है, जो स्ट्रांग इम्युनिटी वालो में जल्दी पता लगाना मुश्किल है, थोड़ी लापरवाही से कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है, इसके लिये अब सचेत होंना आवश्यक है।

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