'ग्राउंड रिपोर्ट' का प्रोमो तथा उछलते कूदते तथा एक्टिंग करते चैनलों पर हर कोई देखता-सुनता है- 'सावधान ! तेजी से पसार रहा कोरोना वायरस' । 'अपना बोरिया बिस्तर बांध लीजिए, बस तत्काल ट्रेन फिर चलने लगेगी' आदि आदि का चीखते-चिल्लाते पुरुष तथा महिला एंकरों को दे। तमाम दर्शकों को लगता है कि 'शोले' फ़िल्म का प्रभाव अब भी सिर चढ़कर बोल रहा है ।
इसमें ग्राउंड रिपोर्ट क्या है ?- महाराष्ट्र में रेल विभाग की एक प्रेस विज्ञप्ति जिसमें 'प्रस्तावित रेल संचालन' की बात कहीं गई थी, लेकिन अभिनय की व्यस्तता में 'प्रस्तावित' शब्द का अर्थ ही नहीं समझ पाए देश-विदेश को हर क्षेत्र की बात समझाने वाले ।
राम-रहीम से लेकर चुनावों में- इस तरह के मौकों पर ग्राउंड जीरो रिपोर्ट की खिचड़ी परोसने वाले चैनल कोरोना में ग्राउंड में जाने से दहल रहे हैं । स्वाभाविक है कि दहलना भी चाहिए । लेकिन विज्ञप्तियों को प्रसारित करने, मंत्रियों का बयान जारी करने में कौन सा ग्राउंड और कौन सी उसकी रिपोर्ट ?, इसका माजरा अनेकानेक प्रबुद्ध दर्शक नहीं समझ पा रहे है ।
कामर्शियल कम्पनियों को लुभाने का उपक्रम-एक तो कोरोना का आतंक और उसके साथ इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों में कई चैनलों का सनसनी फैलाकर TRP ग्राफ हाई करने का प्रयास 'एक तो तितलौकी दूसरे नीम चढ़ी' की हालत पैदा किए है । राष्ट्रीय संकट की घड़ी में पब्लिसिटी (विज्ञापनों) की यह होड़ कितना मानवीय है ?, इस पर प्रबुद्ध वर्ग को सोचने की जरूरत है ।
लोकसभा और राज्यसभा चैनल के एंकर- उक्त चैनलों के एंकर तो नहीं उछलते कूदते दिखाई पड़ते हैं । दर्शकों को खबर देते समय ढोल-मजीरे की थाप पर नाचते-झूमते आने का क्या मतलब है, जब इनसे पूछा जाता है तो स्पष्ट उत्तर मिलता है- 'अमा यार छोड़ो, हम पत्रकारिता थोड़े कर रहे, हम तो पेट-पर्दा चलाने के लिए नौकरी कर रहे हैं । मालिक कहेगा तो वस्त्र हो या वस्त्रविहीन हमें स्क्रीन पर आना ही है । बाबू, यह पेट का सवाल है म
दर्शकों को मूर्ख बनाया जा रहा है- इंटरनेट के जमाने में जब एक डॉट (.) का महत्त्व है तो अनर्गल शब्दों का प्रयोग कर दर्शकों को बेवकूफ नहीं बनाया जा रहा है ?'
क्या यह भोजन-2 है- कोई व्यक्ति भोजन के लिए बैठे और एक रोटी के बाद 2 या उसके बाद 3 या 4 रोटी खा ले तो क्या उसे भोजन-2, या भोजन-3.और 4 कहेंगे ? यह तो तब कहा जाता कि एक बार भोजन करने के बाद कुछ घण्टे के अंतराल पर दूसरी, तोसरी और चौथी बार भोजन करे तब लॉकडाउन-2 स्टाइल में टू, थ्री या फोर कहा जा सकता है । वैसे तो लॉकडाउन को एक्सटेंड किया गया तो वह लॉकडाउन-2 कैसे हो जाएगा ? कोई तो इसका जवाब दे दो मेरे भाय !
सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।©
इसमें ग्राउंड रिपोर्ट क्या है ?- महाराष्ट्र में रेल विभाग की एक प्रेस विज्ञप्ति जिसमें 'प्रस्तावित रेल संचालन' की बात कहीं गई थी, लेकिन अभिनय की व्यस्तता में 'प्रस्तावित' शब्द का अर्थ ही नहीं समझ पाए देश-विदेश को हर क्षेत्र की बात समझाने वाले ।
राम-रहीम से लेकर चुनावों में- इस तरह के मौकों पर ग्राउंड जीरो रिपोर्ट की खिचड़ी परोसने वाले चैनल कोरोना में ग्राउंड में जाने से दहल रहे हैं । स्वाभाविक है कि दहलना भी चाहिए । लेकिन विज्ञप्तियों को प्रसारित करने, मंत्रियों का बयान जारी करने में कौन सा ग्राउंड और कौन सी उसकी रिपोर्ट ?, इसका माजरा अनेकानेक प्रबुद्ध दर्शक नहीं समझ पा रहे है ।
कामर्शियल कम्पनियों को लुभाने का उपक्रम-एक तो कोरोना का आतंक और उसके साथ इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों में कई चैनलों का सनसनी फैलाकर TRP ग्राफ हाई करने का प्रयास 'एक तो तितलौकी दूसरे नीम चढ़ी' की हालत पैदा किए है । राष्ट्रीय संकट की घड़ी में पब्लिसिटी (विज्ञापनों) की यह होड़ कितना मानवीय है ?, इस पर प्रबुद्ध वर्ग को सोचने की जरूरत है ।
लोकसभा और राज्यसभा चैनल के एंकर- उक्त चैनलों के एंकर तो नहीं उछलते कूदते दिखाई पड़ते हैं । दर्शकों को खबर देते समय ढोल-मजीरे की थाप पर नाचते-झूमते आने का क्या मतलब है, जब इनसे पूछा जाता है तो स्पष्ट उत्तर मिलता है- 'अमा यार छोड़ो, हम पत्रकारिता थोड़े कर रहे, हम तो पेट-पर्दा चलाने के लिए नौकरी कर रहे हैं । मालिक कहेगा तो वस्त्र हो या वस्त्रविहीन हमें स्क्रीन पर आना ही है । बाबू, यह पेट का सवाल है म
दर्शकों को मूर्ख बनाया जा रहा है- इंटरनेट के जमाने में जब एक डॉट (.) का महत्त्व है तो अनर्गल शब्दों का प्रयोग कर दर्शकों को बेवकूफ नहीं बनाया जा रहा है ?'
क्या यह भोजन-2 है- कोई व्यक्ति भोजन के लिए बैठे और एक रोटी के बाद 2 या उसके बाद 3 या 4 रोटी खा ले तो क्या उसे भोजन-2, या भोजन-3.और 4 कहेंगे ? यह तो तब कहा जाता कि एक बार भोजन करने के बाद कुछ घण्टे के अंतराल पर दूसरी, तोसरी और चौथी बार भोजन करे तब लॉकडाउन-2 स्टाइल में टू, थ्री या फोर कहा जा सकता है । वैसे तो लॉकडाउन को एक्सटेंड किया गया तो वह लॉकडाउन-2 कैसे हो जाएगा ? कोई तो इसका जवाब दे दो मेरे भाय !
सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।©


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