रजनीकांत अवस्थी
शिवगढ़/रायबरेली: उज्जवला गैस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं को बांटे गए गैस सिलेंडर महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।
आपको बता दें कि, पहले महिलाएं लकड़ी कण्डों से खाना बनाते समय चूल्हा फूकती रहती थी, और उनकी आंखों से आंसू बहा करते थे। जब से महिलाओं को उज्जवला गैस योजनान्तर्गत नि:शुल्क गैस सिलेंडर मिले हैं, तब से महिलाओं के लिए खाना बनाना आसान हो गया है।
गरीब महिलाओं की माने तो, गैस सिलेंडर उनकी पहुंच से काफी दूर थे, यदि पीएम मोदी ने उज्जवला गैस योजना न चलाई होती, तो गैस सिलेंडर में खाना बनाना उनके लिए किसी स्वप्न से कम नहीं था। बैंती गांव की रहने वाली उज्जवला गैस योजना की लाभार्थी सुमन, मिथिलेश कुमारी का कहना है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 महीने के लिए गैस सिलेंडर मुक्त करके बहुत अच्छा काम किया है। यदि मोदी जी 3 महीने के लिए गैस सिलेंडर नि:शुल्क न करते तो, गरीब परिवार गैस सिलेंडर न भरवा पाते। क्योंकि लॉकडाउन के चलते गरीब, बेसहारा एवं दिहाड़ी मजदूरों की हालत बद से बदतर हो गई है। जिन्हे अपनी जीविका चला पाना मुश्किल साबित हो रहा है।
शिवगढ़/रायबरेली: उज्जवला गैस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं को बांटे गए गैस सिलेंडर महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।
आपको बता दें कि, पहले महिलाएं लकड़ी कण्डों से खाना बनाते समय चूल्हा फूकती रहती थी, और उनकी आंखों से आंसू बहा करते थे। जब से महिलाओं को उज्जवला गैस योजनान्तर्गत नि:शुल्क गैस सिलेंडर मिले हैं, तब से महिलाओं के लिए खाना बनाना आसान हो गया है।
गरीब महिलाओं की माने तो, गैस सिलेंडर उनकी पहुंच से काफी दूर थे, यदि पीएम मोदी ने उज्जवला गैस योजना न चलाई होती, तो गैस सिलेंडर में खाना बनाना उनके लिए किसी स्वप्न से कम नहीं था। बैंती गांव की रहने वाली उज्जवला गैस योजना की लाभार्थी सुमन, मिथिलेश कुमारी का कहना है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 महीने के लिए गैस सिलेंडर मुक्त करके बहुत अच्छा काम किया है। यदि मोदी जी 3 महीने के लिए गैस सिलेंडर नि:शुल्क न करते तो, गरीब परिवार गैस सिलेंडर न भरवा पाते। क्योंकि लॉकडाउन के चलते गरीब, बेसहारा एवं दिहाड़ी मजदूरों की हालत बद से बदतर हो गई है। जिन्हे अपनी जीविका चला पाना मुश्किल साबित हो रहा है।

0 टिप्पणियाँ