◆कब्रिस्तान क्यूँ नकारा जाता है,
लोग खुद ही वहाँ आते है,
वह तो नहीं बुलाता है,
फिर भी नकारा जाता है,
क्यूँ नकारा जाता है?
◆बेचारा खुद ही खामोशी तनहाई में,
घुट - घुट कर बेताब हुआ करता है,
कभी एकान्त में कोई दीवाना,
कुछ क्षण मिलन के वहीं बिताता है,
फिर वादे कर के खुद तो चला जाता है,
लौट के नहीं आता है,
फिर भी नकारा जाता है,
क्यूँ नकारा जाता है?
◆जो भी रहने आता है,
अपना अधिकार जमता है,
बेसहारा को सहारा दिया जाता है,
इस कथन को सच्ची तरह निभाता है,
फिर भी नकारा जाता है,
क्यूँ नकारा जाता है ?
◆कभी मातम,
कभी कस्में,
कभी दीया,
कभी रस्में,
केवल याद गार की दीवारें,
दरवाज़ा नज़र नही आता है,
फिर भी नकारा जाता है ।
◆Written by ~ कमल बाजपेई
लोग खुद ही वहाँ आते है,
वह तो नहीं बुलाता है,
फिर भी नकारा जाता है,
क्यूँ नकारा जाता है?
◆बेचारा खुद ही खामोशी तनहाई में,
घुट - घुट कर बेताब हुआ करता है,
कभी एकान्त में कोई दीवाना,
कुछ क्षण मिलन के वहीं बिताता है,
फिर वादे कर के खुद तो चला जाता है,
लौट के नहीं आता है,
फिर भी नकारा जाता है,
क्यूँ नकारा जाता है?
◆जो भी रहने आता है,
अपना अधिकार जमता है,
बेसहारा को सहारा दिया जाता है,
इस कथन को सच्ची तरह निभाता है,
फिर भी नकारा जाता है,
क्यूँ नकारा जाता है ?
◆कभी मातम,
कभी कस्में,
कभी दीया,
कभी रस्में,
केवल याद गार की दीवारें,
दरवाज़ा नज़र नही आता है,
फिर भी नकारा जाता है ।
◆Written by ~ कमल बाजपेई

1 टिप्पणियाँ
कब्रिस्तान क्यों नकारा जाता है l कविता बहुत अच्छी लगी है शुक्रिया 👋 जी 🙏
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