बाहर से आने वालों को धान का बेहन मान रहे लोग---
मिर्जापुर। आसमां और धरती के बीच रहता है इंसान । कुछ खता तो हुई है सर्वाधिक दिमाग वाले इंसानों से । महीनों से आसमान से उमड़ते-घुमड़ते बादलों का रूख़ रूखा रूखा-सा है । रह रहकर उमड़ते-घुमड़ते बादल लोक-लुभावन नहीं बल्कि लोक-डरावन रूप में मंडराते दिख रहे हैं । केवल किसान ही नहीं बल्कि किस किस पर ये गाज बनकर गिर रहे हैं, यह तो सभी देख-सुन रहे ही हैं ।
धरती भी डोल रही- आसमान की अर्धांगिनी है धरती । दोनों में पवित्र रिश्ता है । दोनों में सामंजस्य है । दोनों संवाद भी करते हैं, ऐसा धर्मशास्त्र कहता है तो वैज्ञानिक सूर्य का ही अंश धरती को मानते हैं । जब सिर्फ सूर्य का ही अस्तित्व था तो ब्रह्माण्ड में घूमते सूर्य से धरती ही नहीं अन्य ग्रह अस्तित्व में आए ।
फँसलों की बर्बादी- रवि भगवान की कृपा से रबी की अच्छी फ़सल हुई थी । लेकिन चैत्र माह से ही मिलती बद्दुआओं के रूप में आंधी-पानी, ओला-पत्थरों ने किसानों के साथ उपभोक्ताओं की खुशियों को जमींदोज करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखा है ।
खरीफ की फसल- खरीफ की फसल का क्या होगा, यह तो कोरोना के ताना-बाना पर निर्भर है । आतंक का इसका कोटा पूरा हो चुका रहेगा तो संभवतः लॉकडाउन में ढील हो और जिले के 84 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि से मानक के अनुसार 27 लाख कुंटल धान उत्पादित हो जाए । लगभग 27 लाख आबादी वाले मिर्जापुर में प्रति व्यक्ति एक कुंटल का जीवन-निर्वाह भत्ता मिल जाए वरना श्रीकृष्ण जाने क्या होगा ?
श्री कृष्ण चावल-प्रेमी थे- वर्तमान में सुदामा जैसी स्थिति में हुए लोगों पर योगमाया के भाई की कृपा जरूर होगी, ऐसा विंध्यवासियों को अनुमान है । सुदामा के एक मुट्ठी चावल पर दो लोक दे दिया था द्वारिकाधीश ने । उसी द्वारिकाधीश के धाम (गुजरात) के पीएम मोदी से उम्मीद है कि किसानों पर उनकी अनुकम्पा होगी ताकि इस फसल से बर्बाद रबी की भी भरपाई हो जाए । किसानों को इस हाल में अधिकतम छूट की वे घोषणा कर दें तो दुःख के आंसू कम हो जाएं ।
लागडॉट में कोरोना - धान की खेती से कोरोना लागडॉट करता भी दिख रहा है । धान की खेती में पहले नर्सरी में बीज बोया जाता है फिर 20-25 दिन बाद अंकुरित बेहन की रोपाई होती है। इन दिनों गैर जिले और प्रदेशों से आने वाले माने जा रहे कि वे कोरोना के बेहन बनकर जिले में रोपाई के लिए आ रहे हैं । इनके आने से संक्रमण बढ़ेगा । इसलिए कई प्रदेशों ने बेहन लेने से इनकार भी कर दिया है ।
किसानों को मिले छूट-अभी तक बीज पर 50% सब्सिडी पहले पूरा मूल्य देने के बाद लौटाई जाती थी । किसानों की मांग है कि इस बार उन्हें पूर्ण सब्सिडी में बीज दिया जाए क्योंकि उनकी झोली खाली है । ऐसे ही खाद भी जितने अधिक रियायत पर सरकार देगी, किसानों की टेढ़ी कमर उतनी जल्दी सीधी होगी ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
मिर्जापुर। आसमां और धरती के बीच रहता है इंसान । कुछ खता तो हुई है सर्वाधिक दिमाग वाले इंसानों से । महीनों से आसमान से उमड़ते-घुमड़ते बादलों का रूख़ रूखा रूखा-सा है । रह रहकर उमड़ते-घुमड़ते बादल लोक-लुभावन नहीं बल्कि लोक-डरावन रूप में मंडराते दिख रहे हैं । केवल किसान ही नहीं बल्कि किस किस पर ये गाज बनकर गिर रहे हैं, यह तो सभी देख-सुन रहे ही हैं ।
धरती भी डोल रही- आसमान की अर्धांगिनी है धरती । दोनों में पवित्र रिश्ता है । दोनों में सामंजस्य है । दोनों संवाद भी करते हैं, ऐसा धर्मशास्त्र कहता है तो वैज्ञानिक सूर्य का ही अंश धरती को मानते हैं । जब सिर्फ सूर्य का ही अस्तित्व था तो ब्रह्माण्ड में घूमते सूर्य से धरती ही नहीं अन्य ग्रह अस्तित्व में आए ।
फँसलों की बर्बादी- रवि भगवान की कृपा से रबी की अच्छी फ़सल हुई थी । लेकिन चैत्र माह से ही मिलती बद्दुआओं के रूप में आंधी-पानी, ओला-पत्थरों ने किसानों के साथ उपभोक्ताओं की खुशियों को जमींदोज करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखा है ।
खरीफ की फसल- खरीफ की फसल का क्या होगा, यह तो कोरोना के ताना-बाना पर निर्भर है । आतंक का इसका कोटा पूरा हो चुका रहेगा तो संभवतः लॉकडाउन में ढील हो और जिले के 84 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि से मानक के अनुसार 27 लाख कुंटल धान उत्पादित हो जाए । लगभग 27 लाख आबादी वाले मिर्जापुर में प्रति व्यक्ति एक कुंटल का जीवन-निर्वाह भत्ता मिल जाए वरना श्रीकृष्ण जाने क्या होगा ?
श्री कृष्ण चावल-प्रेमी थे- वर्तमान में सुदामा जैसी स्थिति में हुए लोगों पर योगमाया के भाई की कृपा जरूर होगी, ऐसा विंध्यवासियों को अनुमान है । सुदामा के एक मुट्ठी चावल पर दो लोक दे दिया था द्वारिकाधीश ने । उसी द्वारिकाधीश के धाम (गुजरात) के पीएम मोदी से उम्मीद है कि किसानों पर उनकी अनुकम्पा होगी ताकि इस फसल से बर्बाद रबी की भी भरपाई हो जाए । किसानों को इस हाल में अधिकतम छूट की वे घोषणा कर दें तो दुःख के आंसू कम हो जाएं ।
लागडॉट में कोरोना - धान की खेती से कोरोना लागडॉट करता भी दिख रहा है । धान की खेती में पहले नर्सरी में बीज बोया जाता है फिर 20-25 दिन बाद अंकुरित बेहन की रोपाई होती है। इन दिनों गैर जिले और प्रदेशों से आने वाले माने जा रहे कि वे कोरोना के बेहन बनकर जिले में रोपाई के लिए आ रहे हैं । इनके आने से संक्रमण बढ़ेगा । इसलिए कई प्रदेशों ने बेहन लेने से इनकार भी कर दिया है ।
किसानों को मिले छूट-अभी तक बीज पर 50% सब्सिडी पहले पूरा मूल्य देने के बाद लौटाई जाती थी । किसानों की मांग है कि इस बार उन्हें पूर्ण सब्सिडी में बीज दिया जाए क्योंकि उनकी झोली खाली है । ऐसे ही खाद भी जितने अधिक रियायत पर सरकार देगी, किसानों की टेढ़ी कमर उतनी जल्दी सीधी होगी ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।


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