मीरजा(लक्ष्मी) का धाम खुला तो स्वास्थ्य बनाने का विभाग हुआ लॉक कहीं खुशी तो कहीं गम का रहा माहौल

मिर्जापुर। दो विपरीत ध्रुवों का मिलन सोमवार को मां विंध्यवासिनी की नगरी में देखने को मिला । जिसे सामान्य भाषा में मीरघाट और तीरघाट दोनों घाटों का दृश्य कहा जा सकता है ।
कैसा मीरघाट और कैसा तीरघाट- महालक्ष्मी स्वरूपा मां विंध्यवासिनी मीर यानी समुद्र की पुत्री हैं।  इसलिए इस जिले का वास्तविक नाम मीरजापुर ही रहा है लेकिन ब्रिटिशकाल में डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी के कारण इसका नाम मिर्जापुर सरकारी रिकार्ड में कर दिया गया। तबसे शासकीय कार्यों में इसी का प्रयोग होता है।
आध्यात्मिक धाम खुला तो सांसारिक धाम हुआ बंद- 21 मार्च से बंद मीर-जा (लक्ष्मी) का धाम विन्ध्याचल खुला । लोग तन-मन की समृद्धि के लिए मां के धाम से ऊर्जा पाते हैं । यह धाम तो खुला लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या सीमित रही। पूर्वाह्न 10 बजे के बाद खाली खाली-सा रहा मंदिर। अनुमानतः डेढ़-दो हजार की हाजिरी लगी।
संगमनगरी की उपस्थिति- कोई VIP पहले दिन तो नहीं आया लेकिन संगम नगरी प्रयागराज की जिला पँचायत अध्यक्ष श्रीमती रेखा सिंह मां की कृपा-रेखा परिधि में उपस्थित हुई। इनकी ओर से बंदी के दैरान सभी दिन सायं दीप आरती होती थी। राज्याधिकारी पण्डा राजा मिश्र उनकी ओर से प्रतिदिन आरती और श्रृंगार-सामाग्री देते रहे ।
सांसारिक धाम में महामारी की घुसपैठ- जिले के तन-मन को स्वस्थ रखने वाले CMO कार्यालय में मौका पाकर कोरोना घुस गया। यहां तैनात एक फार्मासिस्ट पॉजीटिव क्या हुआ कि घबराहट का बसेरा बन गया दफ्तर। यह तीरघाट बन गया। जो सुन रहा था, वही स्वास्थ्य विभाग के चपेट में आने से तीर की चोट सा घायल महसूस कर रहा था। तत्काल सेनेटाइज कराया गया। एक तरह से यहां प्रवेश निषेध कर दिया गया। पब्लिक को बिल्कुल नहीं जाने दिया गया और जिनकी विशेष जरूरत नहीं थी, उन्हें घर भेज दिया गया। दो दिन कम से कम  यही स्थिति रहेगी।
सैम्पल और रिपोर्ट- सोमवार को 232 रिपोर्ट आई थी जिसमें 5 पॉजीटिव थे जबकि 227 सैम्पल जांच के लिए भेजा गया है।
                     सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।©

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