रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: देश में बढ़ती तेल की कीमतों के विरोध में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने कलेक्ट्रेट पहुँच कर प्रधानमन्त्री को सम्बोधित जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। जिसमे तेल की बढ़ी हुई कीमतें वापस लेते हुए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निर्धारित मूल्यों के अनुसार भारतीय बाजार की दरें निर्धारित करने की मांग की गयी है।
आपको बता दें कि, इस अवसर पर पार्टी जिलाध्यक्ष आफताब अहमद एडवोकेट उर्फ़ रज्जू खान ने कहा कि, पूरा देश इस समय कोरोना संक्रमण के अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है। समाज का कमोबेश हर तबका निराषा का सामना कर रहा है। गरीब भुखमरी का शिकार है, मजदूर की रोजी रोटी छिन गई है। लाकडाउन से उठी परिस्थितियों में सब्जी, फल व दुग्ध उत्पादक, मुर्गी-मत्स्य पालक व लघु पशुपालक और अन्नदाता भयानक आर्थिक चुनौतियों से लड़ रहि है। आपदा से छोटे व मध्य व्यवसायी बुरी तरह से प्रभावित हैं। रोजाना कमाई कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले रेहड़ी, पटरी तथा ठेले वालों के सामने भी रोजी रोटी का भयानक संकट आ खड़ा हुआ है।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि, अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में घटते तेल के दाम के बावजूद भारतीय बाजार में तेल की कीमतें न सिर्फ यथावत रही हैं। बल्कि पिछले 22 दिनों से लगातार पेट्रोल, डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी हो रही है। ऐसा पहली बार है कि, देश के कई राज्यों में डीजल पेट्रोल से भी ज्यादा मंहगा हो गया है। ऐसे कठिन दौर में यह बढ़ोतरी अमानवीय व अलोकतांत्रिक है। डीजल की वृद्धि का सीधा असर किसानों व आम जनमानस पर पड़ता है। क्योंकि इससे हर तरह की लागत में वृद्धि होती है, और जरूरत का हर सामान मंहगा हो जाता है।
उन्होंने अपने मांगपत्र में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ी कीमतें वापस लेते हुए अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में निर्धारित मूल्यों के अनुसार भारतीय बाजार की दरें निर्धारित कराने की मांग की है।
रायबरेली: देश में बढ़ती तेल की कीमतों के विरोध में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने कलेक्ट्रेट पहुँच कर प्रधानमन्त्री को सम्बोधित जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। जिसमे तेल की बढ़ी हुई कीमतें वापस लेते हुए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निर्धारित मूल्यों के अनुसार भारतीय बाजार की दरें निर्धारित करने की मांग की गयी है।
आपको बता दें कि, इस अवसर पर पार्टी जिलाध्यक्ष आफताब अहमद एडवोकेट उर्फ़ रज्जू खान ने कहा कि, पूरा देश इस समय कोरोना संक्रमण के अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है। समाज का कमोबेश हर तबका निराषा का सामना कर रहा है। गरीब भुखमरी का शिकार है, मजदूर की रोजी रोटी छिन गई है। लाकडाउन से उठी परिस्थितियों में सब्जी, फल व दुग्ध उत्पादक, मुर्गी-मत्स्य पालक व लघु पशुपालक और अन्नदाता भयानक आर्थिक चुनौतियों से लड़ रहि है। आपदा से छोटे व मध्य व्यवसायी बुरी तरह से प्रभावित हैं। रोजाना कमाई कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले रेहड़ी, पटरी तथा ठेले वालों के सामने भी रोजी रोटी का भयानक संकट आ खड़ा हुआ है।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि, अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में घटते तेल के दाम के बावजूद भारतीय बाजार में तेल की कीमतें न सिर्फ यथावत रही हैं। बल्कि पिछले 22 दिनों से लगातार पेट्रोल, डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी हो रही है। ऐसा पहली बार है कि, देश के कई राज्यों में डीजल पेट्रोल से भी ज्यादा मंहगा हो गया है। ऐसे कठिन दौर में यह बढ़ोतरी अमानवीय व अलोकतांत्रिक है। डीजल की वृद्धि का सीधा असर किसानों व आम जनमानस पर पड़ता है। क्योंकि इससे हर तरह की लागत में वृद्धि होती है, और जरूरत का हर सामान मंहगा हो जाता है।
उन्होंने अपने मांगपत्र में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ी कीमतें वापस लेते हुए अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में निर्धारित मूल्यों के अनुसार भारतीय बाजार की दरें निर्धारित कराने की मांग की है।




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