रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाने वाली नागपंचमी शनिवार को पूरी धार्मिक आस्था एवं श्रद्धा के साथ माई गई। लॉकडाउन के चलते लोग मंदिरों में जाकर विशेष पूजा अर्चना या लंगर आदि का आयोजन तो नहीं कर सके लेकिन घरों में नागपंचमी को लेकर विशेष उत्साह बना रहा। लोगों ने नाग देवता की पूजा अर्चना व्रत रखकर नागपंचमी मनाई। माना जाता है कि, इस दिन नाग देवता की पूजा करने से भय तथा कालसर्प योग शमन होता है।
आपको बता दें कि, हालांकि उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद में अधिकतर लोग भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की ऋषि पंचमी के दिन नागपंचमी का पर्व मनाते हैं। जो लोग भाद्रपद मास की नांगपंचमी मनाते हैं। उन्होंने पारंपरिक पूजा अनुष्ठान तो नहीं किए। फिर भी घरों में नागपंचमी का भाव देखने को मिला। यहां जो संभव हो सकता था लोगों ने नाग देवता की बाम्बी, वर्मी, के पास पहुंचकर फल, दूध, मीठा, रोट, फूल माला चढ़ाई। बहुत से लोगों ने सर्प के प्रकोप से बचने के लिए नाग पंचमी की पूजा की।
नाग देवता या शिव जी के मंदिर में नागों को जोड़ा चढ़ाया। लोगों ने परिवार के कल्याण के लिए नाग पूजा की।
मान्यता है कि, यह पर्व जीव जंतुओं को सम्मान देने के उद्देश्य से भी मनाया जाता है। माना जाता है कि, प्रकृति के संतुलन के लिए सभी उत्तरदायी हैं। किसी एक की भी कमी से यह संतुलन बिगड़ जाता हैं। हिन्दू धर्म में नागों को प्राचीन काल से पूजनीय माना गया है। सभी सांप भी हमारे समाज का अभिन्न अंग है। इसीलिए इंसानों को नागों की रक्षा करनी चाहिए और इन्हें अकारण सताना नहीं चाहिए।
उधर क्षेत्र के मऊ, सिकंदरपुर, सेमरहा, ताजुद्दीनपुर, मुरैनी, चंदापुर, मोन, हलोर, राघवपुर, हसनपुर, हरदोई, पारा कला, राम गांव, बावन बुजुर्ग बल्ला समेंत कस्बा महराजगंज में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दंगलों का आयोजन किया गया, जिसमें इस बार लोगों के अंदर ज्यादा उत्साह तो नहीं देखने को मिला। लेकिन बच्चों ने गुड़िया पीटने के बाद अखाड़ा कूदने और कुश्ती का भरपूर आनंद उठाया, जिससे बच्चों में उत्साह देखने को मिला, किंतु महिलाओं और घर की बहू बेटियों के चेहरों पर मायूसी साफ झलक रही थी, क्योंकि इस बार नाग पंचमी (गुड़िया) पर कहीं भी पेड़ों पर झूले पड़े दिखाई नहीं दिए।
महराजगंज/रायबरेली: श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाने वाली नागपंचमी शनिवार को पूरी धार्मिक आस्था एवं श्रद्धा के साथ माई गई। लॉकडाउन के चलते लोग मंदिरों में जाकर विशेष पूजा अर्चना या लंगर आदि का आयोजन तो नहीं कर सके लेकिन घरों में नागपंचमी को लेकर विशेष उत्साह बना रहा। लोगों ने नाग देवता की पूजा अर्चना व्रत रखकर नागपंचमी मनाई। माना जाता है कि, इस दिन नाग देवता की पूजा करने से भय तथा कालसर्प योग शमन होता है।
आपको बता दें कि, हालांकि उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद में अधिकतर लोग भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की ऋषि पंचमी के दिन नागपंचमी का पर्व मनाते हैं। जो लोग भाद्रपद मास की नांगपंचमी मनाते हैं। उन्होंने पारंपरिक पूजा अनुष्ठान तो नहीं किए। फिर भी घरों में नागपंचमी का भाव देखने को मिला। यहां जो संभव हो सकता था लोगों ने नाग देवता की बाम्बी, वर्मी, के पास पहुंचकर फल, दूध, मीठा, रोट, फूल माला चढ़ाई। बहुत से लोगों ने सर्प के प्रकोप से बचने के लिए नाग पंचमी की पूजा की।
नाग देवता या शिव जी के मंदिर में नागों को जोड़ा चढ़ाया। लोगों ने परिवार के कल्याण के लिए नाग पूजा की।
मान्यता है कि, यह पर्व जीव जंतुओं को सम्मान देने के उद्देश्य से भी मनाया जाता है। माना जाता है कि, प्रकृति के संतुलन के लिए सभी उत्तरदायी हैं। किसी एक की भी कमी से यह संतुलन बिगड़ जाता हैं। हिन्दू धर्म में नागों को प्राचीन काल से पूजनीय माना गया है। सभी सांप भी हमारे समाज का अभिन्न अंग है। इसीलिए इंसानों को नागों की रक्षा करनी चाहिए और इन्हें अकारण सताना नहीं चाहिए।
उधर क्षेत्र के मऊ, सिकंदरपुर, सेमरहा, ताजुद्दीनपुर, मुरैनी, चंदापुर, मोन, हलोर, राघवपुर, हसनपुर, हरदोई, पारा कला, राम गांव, बावन बुजुर्ग बल्ला समेंत कस्बा महराजगंज में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दंगलों का आयोजन किया गया, जिसमें इस बार लोगों के अंदर ज्यादा उत्साह तो नहीं देखने को मिला। लेकिन बच्चों ने गुड़िया पीटने के बाद अखाड़ा कूदने और कुश्ती का भरपूर आनंद उठाया, जिससे बच्चों में उत्साह देखने को मिला, किंतु महिलाओं और घर की बहू बेटियों के चेहरों पर मायूसी साफ झलक रही थी, क्योंकि इस बार नाग पंचमी (गुड़िया) पर कहीं भी पेड़ों पर झूले पड़े दिखाई नहीं दिए।






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