"बादलों में बने चित्र भी बोलते"

¶ बादलों में बने चित्र देखा करो, हम मिलेंगे वहीं ढूंढते हो कहाँ ।

¶ मैं भटकता रहा खोजता - खोजता, हर मुसाफिर से पूछा तुम्हारा पता, कोई कहता मिले थे हँसी रात में,

¶ फूल की वादियों में दिखे तुम सदा,रात सपने में आकर किसी ने कहा, बादलों में बने चित्र देखा करो, 

¶ हम मिलेंगे वहीं ढूंढते हो कहाँ ।

¶ मन में बातें बहुत सी मचलती रही, मैं कहूँगा सभी तुम मिलोगे लगा,

¶ हो गया वक्त ज्यादा तुम्हें ढूँढ़ते, मेरी हिम्मत भी देने लगी अब दगा,

¶ दिल की आवाज़ ने आज मुझसे कहा, बादलों में बने चित्र देखा करो, 

¶ हम मिलेंगे वहीं ढूंढते हो कहाँ ।

¶ जब मेरे पास थे तुम बहुत खास थे, आँख चेहरे से हटना गँवार न था,

¶ मन से मैं चाहता दिल से तुम चाहते, ख्वाब हमने बहुत से सँवारा न था,

¶ क्या हुई थी खता क्यों कहा आपने, बादलों में बने चित्र देखा करो, 

¶ हम मिलेंगे वहीं ढूंढते हो कहाँ ।

¶ नीला नभ एक पर्दा बड़ा ही सही, तुम उकेरो सभी भाव मन के वहाँ,

¶ हूबहू चित्र जीवंत हो सामने, बात होती अगर चाहते तुम सदा,

¶ ढूँढ़ना, खोजना , भटकना व्यर्थ है, बादलों में बने चित्र देखा करो, 

¶ हम मिलेंगे वहीं ढूंढते हो कहाँ ।

¶ रचयिता ~ कमल बाजपेई

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