महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र पंचायत का ताजुद्दीनपुर गांव इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रहा है। इसकी वजह विगत 5 साल में मौजूदा महिला ग्राम प्रधान राजकुमारी सिंह द्वारा जनता से किए गए वादों को ताबड़तोड़ तरीके से पूरा कराने का मुद्दा अब तूल पकड़ रहा है। मीडिया द्वारा गांव में 5 सालों के दौरान हुए कायाकल्प की तस्वीर जब सोशल मीडिया पर और समाचार पत्रों के माध्यम से प्रमुखता से प्रकाशित हुई, तो गांव सभा में राजनीति का चस्का पालने वाले लोगों में प्रधान के कराए गए, कार्यों का विश्लेषण करना शुरू कर दिया गया। वहीं ग्राम प्रधानी के दावेदार कुछ ऐसे लोग, जो कभी हाथी की सवारी कर चुके हैं, अब वह गधे की सवारी करने को आतुर हैं। उन्हें लगा की मीडिया गांव सभा की सच्ची तस्वीर सबके सामने रख देगा, तो वो सकते में आ गए हैं। अपने राजनीतिक विरोधी से हार तय मान चुके यह लोग अब मीडिया को आईना दिखाने की जुर्रत कर रहे हैं।
आपको बता दें कि, विगत दिनों ग्राम प्रधान राजकुमारी सिंह ने मीडिया के सामने अपनी ग्राम पंचायत में चुनाव से पहले किए गए, वायदे और अब जब 5 साल बीतने को है, तो 5 सालों का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। इनमें महिला ग्राम प्रधान ने वीडियो बयान में बेहिचक अपने द्वारा कराए गए कार्यों और गांव में विरोधियों के उश्रृंखल व्यवहार की जमकर खिंचाई की थी, और विकास कार्यों को एक-एक करके गिना दिया था। जब खबरें वायरल हुई, तो विरोधियों को झटका लगना स्वाभाविक था। लोगों ने अपने-अपने नजरिए से खबर को देखा, और प्रतिक्रियाएं व्यक्त की। परंतु इनप्रतिक्रिया व्यक्त करने वालों में एक नाम ऐसा भी सामने आया है, जो ब्लॉक की राजनीति में 5 साल तक अपनी कमीशन खोरी और भ्रष्ट राजनीति के लिए आज तक जाने जाते है। गांव सभा में लगभग हर जानकार व्यक्ति यह जानता है कि, ऐसे ही व्यक्ति के परिवार में दो पंचवर्षी ग्राम प्रधानी रही। इस दौरान विकास की विभिन्न योजनाओं की, इस ग्राम पंचायत में इस कदर लूट हुई थी कि, उसकी मिसाल अन्य ग्राम सभाओं में ढूंढे नहीं मिलेगी।
वर्षों तक गांव को जिला संपर्क मार्गो से जोड़ने वाली वह सड़क जिसका ठेका गन्ना विभाग को दिलाया गया था चर्चा था कि, भारी कमीशन खोरी के कारण उस सड़क का काम दसियों साल नहीं हुआ, बाद में वर्तमान ब्लाक प्रमुख सत्येंद्र प्रताप सिंह के प्रयास से उस सड़क की बदहाली दूर हो सकी।
आपको यह भी बता दें कि, राजनीति में कभी चर्चित रहे धरती पकड़ के कलयुगी अवतार कहे जाने वाले, इस नेता ने मीडिया पर उंगली उठाने का जो दुस्साहस भरा कार्य किया है, उसको लेकर सारे इलाके में इसकी थू थू हो रही है। आपको यह भी बता दें कि, अगर मीडिया की आलोचना करने से पहले इस व्यक्ति ने लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखकर ग्राम प्रधान और उनके पति द्वारा गिनाए गए विकास कार्यों में कोई कमी निकाल कर मीडिया को बताई होती, और मीडिया उसे प्रसारित ना करती, तब जाकर इसे मीडिया की आलोचना करने का उचित प्रतीत होता। जहां तक गांव में प्रस्तावक और समर्थक ना मिल पाने की बात का सवाल है, तो ऐसे लोगों को अपने परिवार से बाहर जाकर प्रस्तावक और समर्थक लाने के लिए बहुत कड़ी मेहनत और मशक्कत करनी पड़ेगी। यह बात मीडिया को ग्राम पंचायत में सर्वे के दौरान मालूम हुई।
रही बात आगामी प्रधानी और पंचायत चुनाव की तो, अभी तक तो न क्षेत्र का परिसीमन हुआ है, और न पदों का आरक्षण हुआ है। इसलिए कुछ कहना उचित नहीं है। लेकिन गांव के हालात ऐसे हैं कि, अगर प्रधानी का आरक्षण अनारक्षित हुआ, तो प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाले स्वयंभू नेता जी! कितने वोट पाएंगे और वह किस जमीन पर खड़े हैं, यह उन्हें ही नहीं पूरे इलाके को पता चल जाएगा।

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