¶ प्रेम का एक दीपक जलावो प्रिये, रास्ते में तिमिर अब रहेगा नहीं ।
¶ है अशिक्षा यहाँ पर तिमिर रुप में, ज्ञान का दीप हम सब जलायें यहाँ,
¶ इस धरा पर कोई भी अशिक्षित न हो, ऐसा संकल्प लेकर फिरें हम जहाँ ।
¶ प्रेम का एक दीपक जलावो प्रिये, रास्ते में तिमिर अब रहेगा नहीं ।
¶ जो भी करता रहा भ्रष्ट-आचार है, हम सिखायें सबक आज उनको सभी,
¶ मेरे बच्चों तुम्हीं पर निगाहें टिकी, दूर यह भी तिमिर आज कर दो अभी,
¶ प्रेम का एक दीपक जलावो प्रिये, रास्ते में तिमिर अब रहेगा नहीं ।
¶ ना बड़ा हो कोई और न छोटा यहाँ, सबके चेहरों में छाए गुलाबी छटा,
¶ सब सुखी हों सभी कार्य में लिप्त हों, मेघ बरसें घिरी हो सुहानी घटा,
¶ प्रेम का एक दीपक जलावो प्रिये, रास्ते में तिमिर अब रहेगा नहीं ।
¶ रंच भी भाव कलुषित न दिल मे रहें, दानवी कृत्य पर हो कठिन अब सजा,
¶ सभी पूरे करें अपने कर्तव्य को, भिज्ञ हो अपने अधिकार से जन सदा,
¶ प्रेम का एक दीपक जलावो प्रिये, रास्ते में तिमिर अब रहेगा नहीं ।
¶ रचयिता~कमल बाजपेई

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