यूसा हत्याकांड में शहर कोतवाली की भूमिका संदिग्ध।। Raebareli news ।।

 

रजनीकांत अवस्थी

रायबरेली: बीती रात शहर के गुलाब रोड पर यूसा हत्याकांड में शहर कोतवाली पुलिस और आरोपियों के बीच घनिष्ठता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पिछले छः महीने से सुलगते इस मामूली विवाद को हत्या तक पहुंचाने में पुलिस की भूमिका पूरी तरह से संदेह के दायरे में है। सबसे बड़ी बात यह है कि, इस हत्या से कुछ घंटे पहले ही यूसा की ओर से जान का खतरा बताते हुए दी गई तहरीर को ठंढे बस्ते में डालने का पुलिस पर आरोप है।

     आपको बता दें कि, परिजनों के अनुसार हत्यारोपियों ने इससे पहले 12 जुलाई को यूसा के छोटे भाई पर भी फायर झोंका था। जिसका मुकदमा शहर कोतवाली में दर्ज है। लेकिन छ: महीने तक पुलिस ने इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं की। उल्टा हत्यारोपी और उनके सरगना का कोतवाली में संरक्षण बना हुआ था। फुजैल जो इस घटना में आरोपी हैं, शहर कोतवाल और एसएसआई से उनकी दोस्ती को पूरा शहर जानता है। काल डिटेल निकलवाने पर इनके गठजोड़ की हकीकत पूरी तरह खुल सकती है। परिजनों का कहना है कि, बच्चों से शुरू हुए इस विवाद को फुजैल के कहने पर ही पुलिस दबाए पड़ी थी। 

    जानकारी के अनुसार गुरुवार को कब्रिस्तान में शव दफनाते समय भी दोनों पक्षों में नोंक-झोंक हुई थी। जिसे लेकर यूसा की ओर से जान का खतरा बताते हुए पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया गया था। जिस पर किसी ने कोई संज्ञान नहीं लिया। इसी के बाद रात को घर के दरवाजे पर गोली मारकर युवक की हत्या कर दी गई। 

    विदित हो कि, पुलिस डिपार्टमेंट में सबके क्षेत्रीय कार्यकाल की एक सीमा है, लेकिन शहर कोतवाली में इंस्पेक्टर और एसएसआई दोनों सीमाएं पार कर चुके हैं। उनके कार्य क्षेत्र में बदलाव न किये जाने से ही शहर का माहौल अब बिगड़ रहा है। कुछ दिन पहले गल्लामंडी में गैंगवार फिर भाजपा नेता पर जान लेवा हमला उसके बाद बहराना की मारपीट जैसी तमाम घटनाओं में कोतवाली पुलिस की लापरवाही उजागर हो चुकी है। खास कर बहराना मोहल्ले में मारपीट की पुनरावृत्ति इन्हीं की लापरवाही का नतीजा थी। ये तो कहिए कि, सीओ सदर ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेकर कंट्रोल कर लिया, अन्यथा दो समुदायों के बीच मामूली सा विवाद किसी बड़ी घटना का रुप ले सकता था। उसके बाद भी कोतवाली के चार्ज में कोई बदलाव नहीं करके विभाग एक तरह से भारी गलती कर रहा है। 

    उदर नागरिकों का कहना है कि, पुलिस अधीक्षक को चाहिए कि वह स्वयं इन मामलों की पड़ताल करें और पता लगाएं कि किसकी शह पर इतनी बड़ी वारदात अंजाम दी गई है। ऐसे पुलिस कर्मियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उससे पहले कोतवाली में सिपाही से इस्पेक्टर तक प्रत्येक कर्मचारी को फिल्टर करने की जरूरत है। जिससे शहर में पुलिस और अपराधियों के बीच गठजोड़ तोड़ा जा सके।

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