रजनीकांत अवस्थी
बछरावां/रायबरेली: क्षेत्र के जोहवा शर्की गांव में जनहित महासभा के तत्वाधान में बीजेएम के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सावित्रीबाई फुले, सुभाष चंद्र बोस एवं रविदास जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर बीजेएम के प्रदेश अध्यक्ष विनोद मौर्य एवं अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के सदस्य भंते सीलरतन ने सावित्रीबाई फुले, सुभाष चंद्र बोस एवं रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित और दीप प्रज्वलन के साथ नमन वंदन किया।
आपको बता दें कि, बीजेएम के प्रदेश अध्यक्ष विनोद मौर्य ने शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, शिक्षा एकमात्र आधार है, जिस पर मानव जाति का भविष्य निर्भर करता है। शिक्षा ही एक मूल्यवान संपत्ति है, जो मनुष्य प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा शिक्षा एक आधार है, जिस पर मानव जाति का भविष्य निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि, संक्षेप में शिक्षा का अर्थ ज्ञान प्राप्त करना है। उन्होंने यह भी कहा कि, शिक्षा जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है। मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक कुछ न कुछ सीखता ही रहता है, यह सभी शिक्षा के फलस्वरूप है। शिक्षा ज्ञान की हस्तांतरण की प्रक्रिया है। शिक्षा के द्वारा ही ज्ञान प्राप्त होता है। शिक्षा व्यापक है, जो जीवन पर्यंत चलती रहती है। शिक्षा दो प्रकार की औपचारिक शिक्षा और अनौपचारिक शिक्षा होती है। जो शिक्षा समय और स्थान के बंधन में बंधी होती है, वह औपचारिक शिक्षा कहलाती है, जैसे स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय की शिक्षा। जब शिक्षा समय और स्थान से अलग होकर घर, परिवार, समाज में स्वतंत्र रूप से होती है, तो वह शिक्षा अनौपचारिक शिक्षा कहलाती है।
इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के सदस्य भंते सिलरतन ने संपूर्ण मानव जाति को मानवता एवं ममता का संदेश देते हुए कहा कि, भगवान बुद्ध की शिक्षाएं ढाई हजार वर्ष पूर्व से प्रासंगिक हैं। बौद्ध धर्म का मार्ग वैज्ञानिक है। भगवान बुद्ध ने भेदभाव न करते हुए, समता मूलक समाज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। बुद्ध इसलिए महान कहलाते हैं कि, उन्होंने पहली बार मानवता का संदेश पूरे विश्व को दिया। इसलिए वे विश्व धम्म गुरु भी कहलाए। उन्होंने यह भी कहा कि, संसार के सुखों को पाने के लिए हम अनंतकाल तक पुरुषार्थ करते रहे, ऐसा करते हमें यह लगा कि, हम स्थायी सुख नहीं पा सकेंगे, वह हमारा पुरुषार्थ पानी में बिलोने जैसा रहा। अब हमें इस दुर्लभ मानव जीवन में आकर धर्म पुरुषार्थ के माध्यम से शाश्वत सुख को पाना है, ताकि क्षणिक सुख प्राप्ति के फेर में मन दुखी न बने। यदि वैराग्य आ जाए तो फिर चिंता नहीं, क्योंकि जीवन में वैराग्य का आ जाना बहुत बड़ी साधना है। संसार के ये क्षणिक सुख, जो दुखों का निर्माण करते हैं, ऐसे सुखों को देखकर व्यक्ति जाग जाए। जागृत होकर उसे वैराग्य आ जाए, तो वह हमारी सच्ची साधना और आराधना है।
इस मौके पर नंदलाल कुशवाहा, जितेंद्र कुशवाहा जिला अध्यक्ष, अर्जुन कुशवाहा जिला प्रभारी, डॉ बलराम कुशवाहा जिला मीडिया प्रभारी, राकेश कुशवाहा जिला उपाध्यक्ष, देव आनंद रावत आदि उपस्थित रहे।



0 टिप्पणियाँ