राजधानी लखनऊ में 3958 लोग आए कोरोना की चपेट में, लगातार दूसरे दिन 37 संक्रमित ओं की मौत

रजनीकांत अवस्थी

लखनऊ: कोरोना की रफ्तार राजधानी लखनऊ में नहीं थम रही है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन 37 लोगों की संक्रमण से मौत हो गई। वहीं, 3958 नए मरीज भी मिले। बृहस्पतिवार के मुकाबले यह आंकड़ा थोड़ा कम रहा। बताया जा रहा है कि, नए मरीजों में 30 प्रतिशत लोगों के परिवार के सभी सदस्य संक्रमण की चपेट में हैं।

    आपको बता दें कि, राजधानी में शुक्रवार को 6073 मरीजों ने वायरस को मात दी। खास बात यह है कि, इनमें से ज्यादातर ने घर में रहकर कोरोना से जंग जीती। बृहस्पतिवार को 4425 लोगों ने संक्रमण को मात दी थी। 21 अप्रैल को 2269 लोग स्वस्थ हुए थे। इसके बाद से लगातार इनका आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।

     कोरोना से जंग हार गए डॉ0 ऋषि: बलरामपुर चिकित्सालय के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ0 ऋषि सक्सेना का गुरुवार रात निधन हो गया। कोरोना के कारण एक सप्ताह पहले उन्हें बलरामपुर में भर्ती किया गया था। तीन दिन से वह वेंटिलेटर पर थे। गुरुवार रात करीब पौने 11 बजे वह कोरोना से हार गए।   आर्थोपैडिक सर्जन डॉ0 ऋषि ने हिप रिप्लेसमेंट समेत कई जटिल सर्जरी की थीं। वह दो साल पहले चिकित्सालय से सेवानिवृत्त हुए थे, और घर पर ही मरीजों को परामर्श देते थे। 

राहत: संक्रमण दर में आई गिरावट: राजधानी लखनऊ में कोरोना की रफ्तार में गिरावट आई है। अप्रैल की 18 तारीख के आसपास संक्रमण की जो दर 30 से 31 फीसदी तक पहुंच गई थी, वह महीने के आखिरी में 19 से 20 फीसदी पर आ गई है। अधिकारियों व चिकित्सकों ने इसे शुभ संकेत माना है। उनके अनुसार कोविड प्रोटोकॉल के सख्ती से पालन व लोगों के जागरूक होने से ऐसा हुआ है। डीएम अभिषेक प्रकाश ने बताया कि, जिले में रोजाना 24 से 25 हजार तक सैंपल लिए जा रहे हैं। इसी क्रम में संक्रमण दर जो अब सामने आ रही है, वह कम है। महीने की शुरुआत में एक से छह तारीख के बीच जहां 100 लोगों की जांच में पांच से सात मरीज मिल रहे थे। सात तारीख से यह आंकड़ा बढ़ा और 18 अप्रैल के आसपास सौ में 30 तक मरीज मिलने लगे थे। 20 के बाद से संक्रमण दर में गिरावट शुरू हुई और शुक्रवार को इसमें काफी गिरावट आई। सीएमओ कार्यालय के डॉ0 मिलिंद के अनुसार इस समय मरीजों की संख्या 100 की जांच में 19 से 20 के आसपास पहुंच गई है। यही रफ्तार रही तो हफ्ते भर में संक्रमण दर और घटेगी। अधिकारी व चिकित्सक इसका कारण प्रोटोकॉल की सख्ती, नाइट कर्फ्यू आदि को मानते हैं। उनके अनुसार लोग भी सजग हुए हैं। वहीं, ऑफिसों में कम लोग जा रहे। हफ्ते में दो से तीन दिन कर्फ्यू लग रहा है।



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                             शिवाकांत अवस्थी


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