रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: जिले में एक बार फिर निरक्षर और कम पढ़े-लिखे के हाथों में गांवों की सरकार आ गई है। इसी के विपरीत एमए, पीएचडी व अन्य डिग्री धारक भी इस बार गांव की सरकार के मुखिया बने हैं। जिले में डेढ़ सौ से अधिक प्रधान स्नातक या परास्नातक पास हैं, तो प्रधान बनने में निरक्षरों और कम पढ़े-लिखे लोगों की भरमार है।
आपको बता दें कि, राही ब्लॉक के दोहरी ग्राम पंचायत से प्रधान बने आशीष कुमार ने पीएचडी की है। इस बार आशीष को गांव की सत्ता मिली है। परास्नातक पास प्रधानों की संख्या भी 50 से अधिक है। जगतपुर में धर्मदासपुर प्रधान चुनी गईं ममता परास्नातक हैं। ऊंचाहार के सवैया की प्रधान बनीं, संगीता, खोजनपुर की प्रधान राची गुप्ता, सतांव की प्रधान रंजीता वर्मा, केलौली प्रधान महामाया, हरचंदपुर ब्लॉक के शोरा की प्रधान प्रेमलता भी परास्नातक हैं। इसके अलावा महराजगंज ब्लॉक के पखनपुर की प्रधान संगीता, सिकंदरपुर की प्रधान संध्या सिंह, खीरों ब्लॉक के निहस्था प्रधान नेहा सिंह, शिवगढ़ ब्लॉक के ढेकवा प्रधान शालिनी सिंह भी परास्नातक हैं।
इसके अलावा स्नातक पास लोग भी इस बार प्रधान काफी संख्या में बने हैं। इसके विपरीत निरक्षर और कम पढ़े-लिखे प्रधानों की भी भरमार है।
◆गांव की सत्ता के लिए युवाओं का दबदबा।
पंचायत चुनाव में इस बार शुरू से ही युवा वर्ग सक्रिय रहा। इसी का नतीजा रहा कि, प्रधान पद की सीटों पर कई युवाओं ने जीत दर्ज कराई है। बीए या एमए करने के साथ ही मैदान में कूदे युवाओं से गांव के वोटरों का विकास की आस देखने को मिली। इसी का नतीजा रहा कि, बुजुर्ग प्रत्याशियों को नकारकर वोटरों ने युवा प्रत्याशियों के हाथों में गांवों की सत्ता दे दी है।

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