◆शासन व प्रशासन का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा गांव।
◆पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रभात साहू ने कराया था गांव का सैनिटाइजेशन।
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र के मऊ गांव और उसके मजरे बरीबरा में विगत 12 अप्रैल 2021 से गांव में असामाजिक मौतों का जो सिलसिला शुरू हुआ वह आज भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। गांव में अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है। जिनमें जिनमें से चार लोगों को तो कोरोना की पुष्टि हो चुकी है, शेष लोगों में अधिकतर उस प्रकार के लक्षण पाए गए थे, जो कोरोना से मिलते जुलते थे। हालत यह रही कि, मौतें होती रही, लेकिन प्रशासन खामोशी से बैठा रहा। गांव में ना तो टीकाकरण की व्यवस्था कराई गई और ना ही गांव को कंटेंटमेंट जोन घोषित किया गया, ना ही व्यापक रूप से लोगों का कोरोना टेस्ट कराया गया। ग्रामीणों की चिंता और परेशानी देखते हुए पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रभात साहू ने नगर पंचायत महराजगंज की ओर से मशीनें और टैंकर भेज कर एक बार गांव का सैनिटाइजेशन जरूर कराया है। ग्रामीणों में सरकारी अमले की अनदेखी से काफी रोष है।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रभात साहूू ने नगर पंचायत महराजगंज द्वारा कराया था गांव का सैनिटाइजेशन।आपको बता दें कि, पंचायती चुनाव के दौरान मतदान से 3 दिन पहले गांव में मौतों का सिलसिला शुरू हुआ। पहली मौत मऊ बाजार के रहने वाले अमीन की पत्नी उम्र करीब 45 वर्ष के बारे में अमीन का कहना है कि, उन्हें खांसी बुखार जुखाम के साथ समस्या पैदा हुई, और फिर सांस लेने में काफी दिक्कत होने के बाद वह गांव में उपचार कराते रहे, लेकिन उनकी मौत हो गई। इसके अलावा बगल के ही रहने वाले वारिस अली जो बिल्कुल स्वस्थ दिख रहे थे, अचानक उन्हें सीने में दर्द हुआ, फिर सांस लेने में दिक्कत पैदा हो गई। जब तक घरवाले उन्हें इलाज के लिए ले जाने की व्यवस्था करते, उन्होंने दम तोड़ दिया।
एसकेेे इंडिया न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्टइसी प्रकार रोजाना एक या दो मौतों का सिलसिला शुरू हो गया, जो अभी तक जारी है। इनमें सर्वाधिक चर्चित मामला बरीबरा के रहने वाले मथुरा पासी का बड़ा लड़का रामनरेश 45 जो दिल्ली में काम करता था, वहां से उसने घरवालों को फोन किया कि, उसको करोना पॉजिटिव निकला है, और वह दिल्ली से वापस घर आ रहा है, घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। वहीं उसका अंतिम संस्कार गांव में किया गया। उसकी चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि, उसका छोटा भाई राम सजीवन 40 अपनी ससुराल गया था, जिसकी वहां हालत बिगड़ गई, उसे सांस लेने में भारी दिक्कत हुई, रिश्तेदार जब तक अस्पताल ले जाते उसकी भी मौत हो गई। सिलसिला यहां भी नहीं थमा कि, उसके पिता मथुरा प्रसाद पासी जो अपने दो लड़कों की अर्थी को कंधा दे चुके थे, उन्हें भी कोरोना जैसे लक्षण प्रतीत हुए और रात 12:00 बजे तबीयत बिगड़ी घर पर ही उनकी मौत हो गई। 10 दिन के अंदर एक ही परिवार के तीन लोगों का मर जाना पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गया। एक-एक करके 25 लोग, मौत के गाल में समा गए। इनमें शत्रुघ्न मिश्रा की मौत लेबल-2 हॉस्पिटल लालगंज में हुई है। जबकि अजय कुमार पांडेय को जिला अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव बताकर level-2 रेफर किया गया था। रास्ते में ही उनकी मौत की पुष्टि हो गई। इसके अलावा गणेश गुप्ता और लक्ष्मन चौरसिया इनकी भी कोरोना से मिलते जुलते लक्षणों के चलते मौत हो गई। उधर लगातार हो रही मौतों से ग्रामीण खौफ़जदा है।
फोटो: एसके इंडिया न्यूज़गांव के रहने वाले दुर्गेश कुमार शुक्ला ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई है कि, गांव में बीमारियां महामारी का रूप ले रही हैं। लेकिन प्रशासन द्वारा ना तो गांव की सरकारी तौर पर सैनिटाइजेशन कराया गया, ना ही कैंप लगाकर लोगों का कोरोना परीक्षण कराया गया और न हीं दवाएं वितरित की गई।
एसकेे इंडिया न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट।वहीं गांव के वरिष्ठ समाजसेवी अभय प्रताप सिंह उर्फ दिलीप ने कहा कि, स्वास्थ्य सुविधाओं का मऊ में अभाव है। छोटी-छोटी बीमारियों के लिए सीएचसी आना पड़ता है, और गांव में हफ्ते में कम से कम 2 दिन स्वास्थ्य परीक्षण का कैंप लगवाया जाना चाहिए।
फोटो: एसके इंडिया न्यूज़।जबकि, युवा नेता राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि, उन्होंने जब से होश संभाला है, ऐसी भयावह स्थिति कभी नहीं देखी है। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के चलते यह स्थिति आई है कि, सरकार को मऊ में हुई मौतों की जांच करा कर कार्यवाही करनी चाहिए।
फोटो: एसके इंडिया न्यूज़।पूरे अहलादी मजरे मऊ के रहने वाले लक्ष्मीकांत अवस्थी ने आरोप लगाया है कि, गांव में इतनी घटनाएं हो गई, न शासन ना प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी यह पता लगाने आया कि, मऊ में हो क्या रहा है। उन्होंने कहा कि, गांव सभा में लोग भगवान भरोसे हैं। हर व्यक्ति शंका में जी रहा है। स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सिफर हैंं।
एसकेे इंडिया न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट।इस दौर में अपने छोटे भाई को खोने वाले लवलेश कुमार पांडेय (प्रधानाध्यापक) ने भी अपने भाई अजय कुमार पांडेय के बारे में बताया कि, रायबरेली जिला अस्पताल में अगर इलाज की समुचित व्यवस्था होती, ऑक्सीजन का सिलेंडर उपलब्ध होता, तो उनके भाई की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने मांग की है कि, सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वेंटीलेटर ऑक्सीजन की व्यवस्था कराई जाए।
फोटो: एसके इंडियाा न्यूज़।मामले में सीएचसी महराजगंज के अधीक्षक डॉ राधाकृष्णन से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि, गांव में लोगों के स्वास्थ्य का सर्वे कराया जा रहा है। कोरोना पॉजिटिव पाए गए लोगों का ब्यावरा लेकर कोरोना प्रोटोकॉल के तहत व्यवस्था कराई जाती है। जहां आवश्यकता होती है वहां टीम भेजकर एंटीजन टेस्ट किट और rt-pcr के द्वारा लोगों की कोरोना जांच भी की जाती है। मऊ में हुई मौतों के बारे में उन्होंने बताया कि, इनमें जो भी व्यक्ति सीएचसी आया, उसके स्वास्थ्य का परीक्षण कर उसे सही परामर्श व अस्पताल में उपलब्ध औषधियां प्रदान की गई। बावजूद इसके सीएचसी में हमारे कई डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ खुद संक्रमित हो गए थे, सीमित स्टाफ के बावजूद रोगियों की सेवा करने में हम पीछे नहीं हैं।









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