कंपोजिट विद्यालय कैड़ावा में बारिश के बाद गंदगी व जलभराव से रोगों का खतरा

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: क्षेत्र में लगातार हो रही रिमझिम बारिश के बाद लोगों को आंशिक रूप से गर्मी में राहत तो जरूर मिली है, लेकिन एक नई समस्या ने घेर लिया है। कैड़ावा कम्पोजिट विद्यालय में व्याप्त गंदगी व जलभराव के कारण अब सड़न उठने लगी है। विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं इस सड़न व गंदगी के कारण होने वाले संक्रामक रोग के खतरे से सहमें हुए हैं। इसके बाद भी क्षेत्रीय प्रतिनिधि व प्रशासन का ध्यान इस ओर नही जा रहा है। लगभग एक माह से इस विद्यालय में कोई सफाई कर्मी सफाई तक करने नहीं गया है। जल भराव के साथ-साथ इंडिया मार्का नल के फाउंडेशन पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, और विद्यालय परिसर में घास के जंगल से विषैले बरसाती जीव जंतुओं के खतरे से भी छात्र-छात्राए भयभीत है।

     आपको बता दें कि, महराजगंज तहसील क्षेत्र के राजस्व गांव कैड़ावा में बड़ी नहर से कुछ दूरी पर मऊ कैड़ावा मार्ग पर स्थापित कंपोजिट विद्यालय में 184 बच्चे पंजीकृत हैं, जिसमें बालिकाओं की संख्या 91 और बालकों की संख्या 93 है। यहां इंचार्ज प्रधानाध्यापक समेत पांच अध्यापक और दो शिक्षामित्र अध्यापन का कार्य संभालते हैं, जबकि एमडीएम के लिए पांच महिला रसोइयां काम करती हैं। हमारी टीम ने जब विद्यालय का निरीक्षण किया तो एक रसोईयां विद्यालय की साफ सफाई झाड़ू लगाते हुए देखी गई। 

    कंपोजिट विद्यालय कैड़ावा में कीचड़ व जलभराव की समस्या के साथ-साथ परिसर में उगी बड़ी-बड़ी घास इंडिया मार्का हैंडपंप के फाउंडेशन पर जल भराव और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। विद्यालय के मुख्य द्वार के अलावा एमडीएम रसोई घर के पास भी गंदगी का साम्राज्य है। ऐसे में यहां पढ़ने आने वाले नौनिहालो को उठने वाली दुर्गंध से सांस लेना भी दूभर हो गया है। ऐसे में यहां शिक्षण कार्य देख रहे शिक्षक भी संक्रामक रोग का शिकार हो सकते हैं। यही हाल मऊ कैड़ावा मार्ग पर ठाकुरपुर गांव से लेकर कंपोजिट विद्यालय तक का भी है। कंपोजिट विद्यालय परिसर तो पूरी तरह से जंगल में तब्दील हो गया है।

    विद्यालय परिसर से जल निकास के लिए नालियों की सफाई न होने के कारण वह चोक हो चुकी है। जिसके चलते नालियों का दूषित जल भी विद्यालय परिसर में ही एकत्र हो रहा है। इससे विद्यालय के बच्चों और शिक्षकों तथा आसपास रहने वाले लोगों में संक्रामक रोग का भय व्याप्त है।

    कंपोजिट विद्यालय के बाउंड्रीवॉल के बाहर लोगों द्वारा कूड़ा फेंका जाता है। पास में निवासरत लोगों की ओर से मवेशियों के गोबर का घूर भी लगा हुआ देखा गया। ऐसे में बरसात बाद निकलने वाली धूप के कारण यहां दुर्गंध उठ रही है।

जिससे बीमारियों की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता हझ। इसके बावजूद प्रशासन और शिक्षा विभाग तथा स्थानीय प्रत्याशी ग्राम प्रधान की ओर से समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

     वहीं इस बारे में उच्चीकृत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ0 पीके श्रीवास्तव ने बताया कि, बरसात के बाद निकलने वाली धूप व उमस के कारण लोगों में डायरिया, उल्टी व दस्त, खसरा, चर्म रोग, मलेरिया आदि का खतरा हो सकता है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि, लोग दूषित जल, खुले व बासी खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचे। बीमारी का लक्षण दिखते ही तत्काल पीड़ित को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाकर चिकित्सक की सलाह लें।

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