रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन के राष्ट्रीय प्रभारी ज्ञान प्रकाश तिवारी ने भारत सरकार से अपील की है कि, सरकार सभी राज्यों के कोटेदारों की जांच करवाएं, क्योंकि यह गरीबों का अन्न है जिसे सरकार अपने राजस्व से गरीबों में बांटती है।
आपको बता दें कि, राष्ट्रीय प्रभारी ज्ञान प्रकाश तिवारी ने कहा कि, इतने साल बीत जाने के बाद भी हमारे देश की गरीबी अभी भी दूर नहीं हो सकी। आज भी हमारे देश में कई फीसदी गरीब सरकार के सहयोग से जी रहे हैं। यह भी हमारे देश के चिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि, हमारा देश विकसित तभी हो सकता है जब हमारे देश की गरीबी दूर हो। लेकिन चिंतनीय है कि, गरीबी पैसे दूर हो? यह बहुत गंभीर समस्या है।
हम जिनके माध्यम से गरीबी दूर कराना चाहते हैं वह खुद चाहते हैं कि, गरीब रहे जिससे उनका विकास हो सके। हमारे देश में भ्रष्टाचार सर चढ़कर बोल रहा है, कोई जमीन के नाम पर लूट रहा है, तो कोई अन्न के नाम पर लूट रहा है, हमारे देश में मानव ही मानव को लूटने के लिए अग्रिम पंक्ति में बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि, ऐसे लोग भुखमरी में भी गरीबों का निवाला डकारने में लगे हैं। कई प्रदेशों में आज भी गरीबों को उनका राशन कार्ड नहीं बन सका है, रोज ऑफिस के चक्कर लगाते लगाते गरीबों के चप्पल टूट जाती है। लेकिन जब उन्हें उनका राशन कार्ड ही नहीं मिलता है तो अन्न कहां से मिलेगा। राशन कार्ड धारक अगर आवाज उठाने की कोशिश भी करते हैं, तो कोटेदारों की दादागिरी सामने आती है, और क्यों ना आए, क्योंकि इनके आका का हाथ इनके ऊपर जो है। सिस्टम को देखने वाले अधिकारी भी दो दिन कार्रवाई कर चुप्पी साध लेते हैं। क्योंकि इनकी भी हिस्सेदारी होती हैं। एक सप्लाई इंस्पेक्टर के क्षेत्र में कितने कोटेदार हैं। प्रति कोटे से इनकी इनकम सुनिश्चित है, तो कार्रवाई किस पर करेंगे।
जहां एक तरफ पूरा भारत लाक डाउन से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर चोर-चोर मौसेरे भाई की जुगलबंदी बनी हुई है। यह बहुत ही चिंतन का विषय है। हमारे देश में इस ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि, विचार करिए अगर सरकार ईमानदार है तो अधिकारी से लेकर कोटेदारों की आय से ज्यादा संपत्ति की जांच हो, तो इन्हें जेल जाने से कोई भी नहीं रोक सकता ही।
रायबरेली: राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन के राष्ट्रीय प्रभारी ज्ञान प्रकाश तिवारी ने भारत सरकार से अपील की है कि, सरकार सभी राज्यों के कोटेदारों की जांच करवाएं, क्योंकि यह गरीबों का अन्न है जिसे सरकार अपने राजस्व से गरीबों में बांटती है।
आपको बता दें कि, राष्ट्रीय प्रभारी ज्ञान प्रकाश तिवारी ने कहा कि, इतने साल बीत जाने के बाद भी हमारे देश की गरीबी अभी भी दूर नहीं हो सकी। आज भी हमारे देश में कई फीसदी गरीब सरकार के सहयोग से जी रहे हैं। यह भी हमारे देश के चिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि, हमारा देश विकसित तभी हो सकता है जब हमारे देश की गरीबी दूर हो। लेकिन चिंतनीय है कि, गरीबी पैसे दूर हो? यह बहुत गंभीर समस्या है।
हम जिनके माध्यम से गरीबी दूर कराना चाहते हैं वह खुद चाहते हैं कि, गरीब रहे जिससे उनका विकास हो सके। हमारे देश में भ्रष्टाचार सर चढ़कर बोल रहा है, कोई जमीन के नाम पर लूट रहा है, तो कोई अन्न के नाम पर लूट रहा है, हमारे देश में मानव ही मानव को लूटने के लिए अग्रिम पंक्ति में बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि, ऐसे लोग भुखमरी में भी गरीबों का निवाला डकारने में लगे हैं। कई प्रदेशों में आज भी गरीबों को उनका राशन कार्ड नहीं बन सका है, रोज ऑफिस के चक्कर लगाते लगाते गरीबों के चप्पल टूट जाती है। लेकिन जब उन्हें उनका राशन कार्ड ही नहीं मिलता है तो अन्न कहां से मिलेगा। राशन कार्ड धारक अगर आवाज उठाने की कोशिश भी करते हैं, तो कोटेदारों की दादागिरी सामने आती है, और क्यों ना आए, क्योंकि इनके आका का हाथ इनके ऊपर जो है। सिस्टम को देखने वाले अधिकारी भी दो दिन कार्रवाई कर चुप्पी साध लेते हैं। क्योंकि इनकी भी हिस्सेदारी होती हैं। एक सप्लाई इंस्पेक्टर के क्षेत्र में कितने कोटेदार हैं। प्रति कोटे से इनकी इनकम सुनिश्चित है, तो कार्रवाई किस पर करेंगे।
जहां एक तरफ पूरा भारत लाक डाउन से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर चोर-चोर मौसेरे भाई की जुगलबंदी बनी हुई है। यह बहुत ही चिंतन का विषय है। हमारे देश में इस ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि, विचार करिए अगर सरकार ईमानदार है तो अधिकारी से लेकर कोटेदारों की आय से ज्यादा संपत्ति की जांच हो, तो इन्हें जेल जाने से कोई भी नहीं रोक सकता ही।

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