रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: मुझे गर्व है कि, मैं पत्रकार हूं। देश कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है, और सरकार के समक्ष एक संकट है। देश के प्रधानमंत्री ने जिस प्रकार एक अभिभावक की तरह आप सभी से आह्वान किया है, लोग इसका पालन भी कर रहे है, और राष्ट्रहित में यह आवश्यक भी है।
आपको बता दें कि, पूरा देश घरों में है, सड़के सन्नाटे में है। बाजार बन्द है। मगर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिस और पत्रकार। यानि कि, हम लोगों की समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी भी है।
संक्रमण के इस दौर में जोखिम तो है ही, लेकिन आपको लेकर मेरी नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है। हालातों को प्रामाणिक रूप से रूबरू कराने के लिए मुझे, तो निकलना ही होगा, ताकि अगले दिन आपको पता लग सके कि, भारत जीत गया और कोरोना हार गया। यही विश्वास हमें आपसे जोड़े रखना है। हमारा आपका रिश्ता अटूट है।
वैश्विक महामारी के शमन के लिए आपके धैर्य की अग्निपरीक्षा है, तो मेरे लिए इसकी अनिवार्यता। अंत में इतना ही कहना चाहूंगा कि "हम तो निकलेंगे, मगर आप मत निकलना।
महराजगंज/रायबरेली: मुझे गर्व है कि, मैं पत्रकार हूं। देश कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है, और सरकार के समक्ष एक संकट है। देश के प्रधानमंत्री ने जिस प्रकार एक अभिभावक की तरह आप सभी से आह्वान किया है, लोग इसका पालन भी कर रहे है, और राष्ट्रहित में यह आवश्यक भी है।
आपको बता दें कि, पूरा देश घरों में है, सड़के सन्नाटे में है। बाजार बन्द है। मगर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिस और पत्रकार। यानि कि, हम लोगों की समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी भी है।
संक्रमण के इस दौर में जोखिम तो है ही, लेकिन आपको लेकर मेरी नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है। हालातों को प्रामाणिक रूप से रूबरू कराने के लिए मुझे, तो निकलना ही होगा, ताकि अगले दिन आपको पता लग सके कि, भारत जीत गया और कोरोना हार गया। यही विश्वास हमें आपसे जोड़े रखना है। हमारा आपका रिश्ता अटूट है।
वैश्विक महामारी के शमन के लिए आपके धैर्य की अग्निपरीक्षा है, तो मेरे लिए इसकी अनिवार्यता। अंत में इतना ही कहना चाहूंगा कि "हम तो निकलेंगे, मगर आप मत निकलना।

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