अधर्म और आसुरी शक्तियों पर धर्म और उदात्त मानवीय मूल्यों की विजय का महापर्व है विजयदशमी-प्रवीण शुक्ला।। Raebareli news ।।

 


बरषहिं सुमन देव मुनि बृंदा।

 जय कृपाल जय जयति मुकुंदा।।

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: विजय दशमी का पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय से माना जाता है। कहते हैं कि, अधर्म अन्याय और आसुरी प्रवृत्तियों पर धर्म न्याय और उदात्त मानवीय मूल्यों की विजय के महापर्व को विजयदशमी के रूप में माना जाता है। यह भी कहते हैं कि, इस दिन श्री राम ने आसुरी शक्ति दशानन रावण का वध किया था। तब से लेकर आज तक यह दिन विजय दशमी के पर्व के रुप में मानाया जाता है। 

    आपको बता दें कि, समाजवादी पार्टी के प्रबुद्ध सभा के बछरावां से विधानसभा उपाध्यक्ष प्रवीण शुक्ला का कहना है कि, आज समाज में अनेकों प्रकार की कुरीतियां विद्यमान है। कहने के लिए तो रावण का वध कर बुराइयों को समूल नष्ट किया जाता है। लेकिन हमारे समाज में आज भी ऐसे रावण जिंदा हैं, जो समाज को गंदा करने का काम करते हैं। महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार, बलात्कार जैसी घटनाएं हमें त्रेता युग के रावण की याद दिलाती है। आज के रावण में जो बुराइयां बसी है। उनको खत्म करने के लिए एक राम नहीं बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ना होगा, और एकता दिखाते हुए सामाजिक कुरीतियों को नष्ट करना होगा। तब जाकर देश का विकास और सामाजिक मान मर्यादाएं सुरक्षित रहेंगी।

    उन्होंने कहा कि, जब तक हमारी बहन बेटी सुरक्षित नहीं हैं, तब तक हमें यह सोचना उचित नहीं होगा कि, हमने रावण का दहन तो कर दिया है, लेकिन रावण हमारे बीच आज भी जीवित है। हमें सबसे पहले अपने अंदर बैठे रावण को दहन करना है, और फिर समाज में निरंतर पैदा हो रहे रावण को नष्ट करना होगा। तब जाकर कहीं बुराई पर अच्छाई का प्रतीक कहें जाने वाला यह त्यौहार विजयदशमी सच साबित हो पाएगा।

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