"है चौथा स्तंभ कष्ट में"

¶ प्रजातन्त्र की उड़े धज्जियाँ, अभिव्यक्ति पर ताले,

¶ पत्रकार पिटवाये जाते, यदि वह खबर निकालें ।

¶ धाँधागर्दी सिर चढ़ बोले, पत्रकारिता बौनी,

¶ आपस में ही मचा द्वन्द है, स्थिति बड़ी घिनौनी।

¶ आज रिपब्लिक परेशान है, सभी मीडिया चुप है,

¶ क्या जाने कल किसका नम्बर, घोर अंधेरा धुप है।

¶ है चौथा स्तम्भ कष्ट में, जनता साथ खड़ी है,

¶ खद्दर धारी रोटी सेंके, किसको कहाँ पड़ी है?

¶ माननीय हैं गूँगे बहरे, धृतराष्ट्रों की मस्ती,

¶ द्रौपदी पर लगा दाँव है, दुर्योधन की बस्ती।

¶ रचयिता~कमल बाजपेयी

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