¶ पत्रकार पिटवाये जाते, यदि वह खबर निकालें ।
¶ धाँधागर्दी सिर चढ़ बोले, पत्रकारिता बौनी,
¶ आपस में ही मचा द्वन्द है, स्थिति बड़ी घिनौनी।
¶ आज रिपब्लिक परेशान है, सभी मीडिया चुप है,
¶ क्या जाने कल किसका नम्बर, घोर अंधेरा धुप है।
¶ है चौथा स्तम्भ कष्ट में, जनता साथ खड़ी है,
¶ खद्दर धारी रोटी सेंके, किसको कहाँ पड़ी है?
¶ माननीय हैं गूँगे बहरे, धृतराष्ट्रों की मस्ती,
¶ द्रौपदी पर लगा दाँव है, दुर्योधन की बस्ती।
¶ रचयिता~कमल बाजपेयी

0 टिप्पणियाँ