रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: जिलाधिकारी द्वारा बीते दिनों बावन बुजुर्ग बल्ला के अजीजगंज गांव में गौशाला में जानवरों की दुर्दशा का मामला प्रकाश में आने के बाद की गई त्वरित कड़ी कार्यवाही के बाद अब गौशालाओं को लेकर फर्जी शिकायतों का दौर शुरू हो गया है। ऐसा ही एक मामला बृहस्पतिवार को असनी में संचालित ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत स्तर की गौशाला को लेकर शरारती तत्वों द्वारा फर्जी शिकायत की गई। जिसमें आरोप लगाया गया कि, यहां 15 पशु मर गए हैं, और जिन्हें संचालकों द्वारा उठाकर शारदा नहर में फेंक दिया गया है। मामले की जांच करने के लिए विभागीय लोगों के अतिरिक्त पत्रकारों ने भी मौके पर पहुंच कर जायजा लिया, तो पूरी शिकायत ही फर्जी निकली, और मजे की बात यह है कि, यह शिकायत जिस मोबाइल नंबर से किया गया था, वह किसी और का था। शिकायतकर्ता ने पड़ोस के गांव बरहुआ की महिला ग्राम प्रधान सीता देवी के पति धीरेंद्र कुमार तिवारी उर्फ जुगुन के नाम से की गई थी, जब महिला ग्राम प्रधान व उनके पति को यह पता चला कि, उनके नाम से फर्जी शिकायत की गई है, तो उन्होंने वह नंबर लेकर उस पर कॉल किया, तो वह नंबर किसी जीतू तिवारी के नाम मिला। दिन भर पति पत्नी इस नंबर पर फोन लगाते रहे। लेकिन हर बार वह स्विच ऑफ मिला। ग्राम प्रधान पति ने गौशाला संचालन की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि, इस फोन नंबर का पता लगाकर उनके नाम का गलत इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्यवाही की जाए।
आपको बता दें कि, असनी गांव में ग्राम पंचायत द्वारा पशु आश्रय स्थल संचालित किया जा रहा है। इसमें देखरेख का जिम्मा ग्राम प्रधान राजकुमार लोधी और हरदोई पशु चिकित्सालय के प्रभारी डॉ सुरेश चंद्र द्वारा किया जा रहा है। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि, यहां पर संचालित गौशाला में 300 से अधिक गोवंश के पशु रखे गए हैं। जिनकी देखरेख बहुत ही सुंदर ढंग से की जा रही है। जानवरों को पौष्टिक आहार दिया जा रहा है, और प्रतिदिन सुबह और शाम डॉक्टर सुरेश कुमार अपनी टीम के साथ आकर पशुओं की देखभाल करते हैं। फिर भी कुछ अराजक तत्व जो ईर्ष्या और विद्वेष से ग्रसित हैं। आए दिन स्थानीय अधिकारियों से लेकर जिले स्तर तक के अधिकारियों को कभी गुमनाम पत्र लिखकर, तो कभी फर्जी फोन करके दिग्भ्रमित करने का प्रयास करते रहते हैं।
मजे की बात यह है कि, हाल ही में की गई शिकायत में कहा गया है कि, 15 पशु मरे और उन्हें शारदा सहायक नहर में फेंक दिया गया। जबकि हकीकत यह है कि, विगत 16 तारीख से शारदा सहायक और उस से निकली अन्य मायनरों में एक बूंद पानी नहीं है, तो पशु कैसे फेंके जाएंगे। अब दूसरा प्रश्न यह उठता है कि, अगर शिकायतकर्ता वास्तव में सही है, तो उसने फर्जी नाम और फर्जी नंबर का सहारा क्यों लिया, और शिकायत करने के बाद लगातार अपना फोन स्विच ऑफ क्यों कर रखा है।
इस मामले में जांच के दौरान उपस्थित ग्रामीणों मुकेश कुमार, राजेश कुमार, बाबू यादव, राकेश यादव, रामू लोधी, संजीव लोधी, प्रभारी लोधी, अकरम, मोहम्मद असलम सहित बड़ी तादाद में लोगों ने कहा कि, वास्तव में यह गौशाला खोलने के बाद इलाके भर के किसानों को छुट्टा जानवरों के संकट से मुक्ति मिल गई है, और कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो इस गौशाला को शिकायत कर कर के बदनाम कर गौशाला हटवा कर किसानों की समस्या बढ़ाना चाहते हैं। ग्रामीणों ने एक स्वर से कहा कि, गौशाला के खिलाफ फर्जी शिकायत करने वालों का पता लगाकर उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए, नहीं तो किसान बड़ा जन आंदोलन छेड़ेगा।


0 टिप्पणियाँ